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विवाह विज्ञान और कामशास्त्र (दाम्पत्य मनोविज्ञान, शारीरिक-मानसिक सामंजस्य एवं सम्पूर्ण विवाह विज्ञान)

विवाह विज्ञान और कामशास्त्र (दाम्पत्य मनोविज्ञान, शारीरिक-मानसिक सामंजस्य एवं सम्पूर्ण विवाह विज्ञान)

Vivah Vigyan Aur Kam Shastra: Dampatya Manovigyan evam Vaidik Vivaha

विवाह विज्ञान शोध पीठ द्वारा

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३६६ आनन्द मन्दिर
देखने मे आता है कि नपुसको की सख्या कम नही है। मेरे पास
नपुसक पुरुषो की स्त्रियां अपने पतियो की चिकित्सा के लिये
आती हैं उनसे मुझे यह अनुभव हुआ ।
गर्भ में दो बच्चे होने का कारण
गर्भाशय मे दो थैली होती हैं एक मे कन्या और एक मे पुत्र ।
सम रात्रियो मे पुत्र का गर्भस्थित होने के लिये पुत्र वाली थैली
का मुख खुला रहता है और विसम रात्रियो मे कन्या के गर्भ की
स्थिति के लिये कन्या वाली थैली का मुख खुला रहता है।
जैसा कि आगे चित्र मे दिया गया है। कभी कभी जब संभोग
के समय वीर्यपात होते वक्त वायु से वीर्य के दो हिस्से हो जाते हैं
और अनियम गर्भाधान क्रिया के कारण दोनो थैलियों का मुह
खुल जाता है तब वीर्य के दो भाग होकर दोनो थैलियो मे गर्भ की
स्थिति होती है और दो बालक एक साथ ही उत्पन्न होते हैं।
गर्भ मे दो बालक होने से माता को कष्ट होता है और कभी
जच्चा और बच्चा दोनो के प्राण सकट मे पड़जाया करते हैं।
यह कारण अनियम रतिक्रिया का ही है।
कभी कभी एक ही मे दो बालक एक जुडे हुए भी होते हैं
दो बालक एक साथ उत्पन्न होने वाले तो सौ मे दस जीवित भी
रहते हैं परन्तु एक साथ जुडे हुए मे एक भी जीवित नही रहता
जो दो बालक एक साथ उत्पन्न होते हैं वे जो जीवित रहे तो एक
साथ दोनो बीमार होते हैं और एक साथ दोनो रोगी होते है।