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विवाह विज्ञान और कामशास्त्र (दाम्पत्य मनोविज्ञान, शारीरिक-मानसिक सामंजस्य एवं सम्पूर्ण विवाह विज्ञान)

विवाह विज्ञान और कामशास्त्र (दाम्पत्य मनोविज्ञान, शारीरिक-मानसिक सामंजस्य एवं सम्पूर्ण विवाह विज्ञान)

Vivah Vigyan Aur Kam Shastra: Dampatya Manovigyan evam Vaidik Vivaha

विवाह विज्ञान शोध पीठ द्वारा

DevanagariHindipublished704 पृष्ठ

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पृष्ठ 533

३६४ आनन्द मन्दिर
पुत्र और कन्या की गर्भ स्थिति का कारण
आयुर्वेद मे गर्भाधान के लिये सम और विसम रात्रियो का
जो नियम वतलाया है उसका यह कारण है कि ऋतुधर्म्म के वाद
सम रात्रियों मे स्त्री रज कम होता है अर्थात् गर्भोत्पादक जीवो
की सम रात्रियो मे कमी रहती है और विसम रात्रियो मे अधिकता
रहती है। इसलिये विसम रात्रियो मे सभोग करने से जो गर्भ
रहता है उससे कन्या का जन्म होता है।
समरात्रि मे रज की कमी रहती है अर्थात् स्त्री के गर्भोत्पा-
दक जीव कम रहते हैं। पुरुप का वीर्य वलवान् पडता है अर्थात्
पुरुप के वीर्य के गर्भोत्पादक जीव अधिक रहने के कारण गर्भ मे
पुत्र होता हैं। इसीलिये सम विसम रात्रियो का विचार रक्खा
गया है। जैसा कि पृष्ठ ३६५ के चित्र से प्रकट होता है।
जो आयुर्वेद के नियमो से अज्ञान हैं वे अपनी पुस्तको मे
लोगो को शिक्षा देते हैं और स्त्री को पुरुप से पहिले स्खलित
होने के अनेक उपाय वतलाते हैं। कोई कोई मूर्ख लोग यहां तक
उपाय वतलाते हैं कि सभोग के समय पति पत्नी एक साथ ही
स्खलित हो तो वड़ा ही आनन्द आता है। मानो स्वर्ग का सीधा
रास्ता वतलाते हैं। आयुर्वेद वतलाता है पति पत्नी दोनो एक
साथ स्खलित हो और गर्भ रह जावे तो नपुंसक सन्तान उत्पन्न
होती है। इस विपय मे पीछे खुलासा लिखा जा चुका है। इसलिये
मूर्खों की पुस्तको पर विश्वास करके संभोग करने के ही कारण