विवाह विज्ञान और कामशास्त्र (दाम्पत्य मनोविज्ञान, शारीरिक-मानसिक सामंजस्य एवं सम्पूर्ण विवाह विज्ञान)
Vivah Vigyan Aur Kam Shastra: Dampatya Manovigyan evam Vaidik Vivaha
विवाह विज्ञान शोध पीठ द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें३४४ आनन्द मन्दिर
परन्तु सब व्यर्थ होता हैं कृपा करके कोई उपाय बतलाइये। क्या
मेरी मूर्खता से तो कोई खराबी नही आगई है ?
एक और स्त्री मेरे पास अभी थोड़े दिन हुए इलाज के
लिये आई उसे पेशाव बड़े कष्ट के साथ होता था। उसके गुप्त
स्थान की मैने परीक्षा की तो देखा कि वह स्थान बहुत सूज गया
था और उसमे कठोरता आगई थी। अधिक स्पर्श के कारण वहां
का मांस कड़ा होगया था। इस स्थान की यहां तक रक्षा करनी
चाहिये कि भूलकर भी स्पर्श न करे मैं जब स्त्रियो के गुप्त स्थान
की परीक्षा करती हूँ तब इस बात का बड़ा ध्यान रखती हूँ कि
हाथ का अथवा पंजों का स्पर्श इस स्थान से न होने पावे।
जब मैंने उस स्त्री की परीक्षा की और उस स्थान की यह
दशा देखी तो मैने उस स्त्री से कहा कि तुम ठीक ठीक
बतलाओ यह रोग तुम्हे कब से है ? कभी तुमने किसी कारण से
इसे उगली से स्पर्श तो नही किया ? उस स्त्री की अवस्था अट्ठारह
उन्नीस वर्ष की थी, मुझे यह सन्देह हुआ कि इसने अपने हाथो
से अपनी उत्तेजना करके अप्राकृतिक क्रिया की होगी। वह बड़ी
लज्जित हुई और कहा—नही मैंने कभी ऐसा नही किया मेरे पति
एक पुस्तक लाये थे उस पुस्तक में इसके विषय मे लिखा था।
तब से प्रतिदिन इस स्थान का उंगलियों से स्पर्श करने से मुझे
उत्तेजना होने लगी। कई महीने तक ऐसा किया अब कुछ दिनो
से मेरी यह दशा होगई है कि पेशाब मे बड़ा कष्ट होता है और
मेरी कभी इच्छा नही होती, मन और शरीर मुर्दा सा हो गया है।