विवाह विज्ञान और कामशास्त्र (दाम्पत्य मनोविज्ञान, शारीरिक-मानसिक सामंजस्य एवं सम्पूर्ण विवाह विज्ञान)
Vivah Vigyan Aur Kam Shastra: Dampatya Manovigyan evam Vaidik Vivaha
विवाह विज्ञान शोध पीठ द्वारा
पृष्ठ 480, कुल 704 में से
संदर्भ में पढ़ेंविवाह विज्ञान-कामशास्त्र ३२६
स्त्री की जननेन्द्री
चित्र नं० १ मे नं० १—२—३— गर्भाशय और ४—५—६
गर्भाशय का मुख इसके बाद नीचे को योनि मार्ग उसके नीचे
प्रवेशद्वार अर्थात् योनि मुख और इसके इधर उधर गुदाद्वार और
मूत्र मार्ग है ऊपर मलाशय और मूत्राशय है जैसा चित्र मे दिख-
लाया गया है ।
इस बात को सभी स्त्री पुरुष जानते हैं कि योनि मार्ग से
सभोग के समय पुरुष की जननेन्द्री स्त्री की जननेन्द्री मे प्रवेश
करती है तब सभोग होता है । स्त्री की जननेन्द्री ऊपर से ढकी
रहती है जिससे उसे किसी प्रकार की हानि न पहुंचे । ऊपर से
देखने से केवल एक दरार सी मालूम देती है। उस दरार को हाथ
की उंगलियो से इधर उधर हटा देने से उसके भीतरी अवयव
दिखलाई देते हैं ।
स्त्री की जननेन्द्री को खोलकर देखने से योनि मार्ग दिखलाई
देता है। योनि मुख से लेकर गर्भाशय के मुख के पास तक अर्थात्
चित्र एक मे नं० ६ के पास तक योनि मार्ग कहलाता है। गर्भाशय
की चौड़ाई आगे की ओर अर्थात् मुख के पास कम और पीछे
की ओर अधिक है। गर्भाशय का मुख रोहू मछली की समान है
गर्भाशय का मुख योनि मार्ग से लगा हुआ है । योनि मार्ग का
विशेष काम है पुरुष की जननेन्द्री द्वारा निकला हुआ वीर्य
गर्भाशय के मुख तक पहुँचा देना ।