विवाह विज्ञान और कामशास्त्र (दाम्पत्य मनोविज्ञान, शारीरिक-मानसिक सामंजस्य एवं सम्पूर्ण विवाह विज्ञान)

विवाह विज्ञान और कामशास्त्र (दाम्पत्य मनोविज्ञान, शारीरिक-मानसिक सामंजस्य एवं सम्पूर्ण विवाह विज्ञान)
Vivah Vigyan Aur Kam Shastra: Dampatya Manovigyan evam Vaidik Vivaha
विवाह विज्ञान शोध पीठ द्वारा
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विवाह विज्ञान-काम
नपुंसकों की संभोग ~~~~~~~~~
आसेक्यश्च सुगंधीच कुम्भीकरश्चैष्य- कृत्य
सरेतसस्त्वमीज्ञेया अशुक्रःषंडसंज्ञितः ॥
अर्थात्—आसेक्य, सुगन्धि, कुम्भिक, और ईर्ष्यक, इन चारों
नपुंसकों में तो उत्तेजनात्मक वीर्य होता है परन्तु स्त्री की सी चेष्टा
वाले नपुंसक में नहीं होता । इसका कारण यह है कि:—
अनयाविप्रकृत्यातु तेषांशुवहा शिराः ।
हर्षात्स्फुटत्वमायान्ति ध्वजोच्छ्रायस्ततो भवेत् ॥
अर्थात्—पहिले कहे हुए चार नपुंसकों में वास्तव में तो वीर्य नहीं
है परन्तु उनकी विरुद्ध चेष्टा (वीर्य भक्षण योनि और पुरुष इन्द्री
का सूंघना, गुदा मैथुन और दूसरे को मैथुन करते देखना )
इन कारणों से वीर्य न रहते हुए भी वीर्य वाली नाड़ियां हर्षयुक्त
होकर फूल जाती हैं उसी से उन नपुंसकों की इन्द्री में चैतन्यता
उत्पन्न होजाती है ।
इसप्रकार की स्त्रियां नपुंसक भी देखी जाती हैं । मेरे पास
इलाज के लिये सभी प्रकार की रोगी स्त्रियां आया करती हैं और
२५ पचीस वर्षों में मैं लाखों स्त्रियो का इलाज कर चुकी हूं इनमे
सभी प्रकार के रोगों वाली स्त्रिया देखी गई । जो स्त्रिया मेरे पास
इलाज के लिये आती हैं वे अपना सभी प्रकार का हाल खुलासा कह