विवाह विज्ञान और कामशास्त्र (दाम्पत्य मनोविज्ञान, शारीरिक-मानसिक सामंजस्य एवं सम्पूर्ण विवाह विज्ञान)
Vivah Vigyan Aur Kam Shastra: Dampatya Manovigyan evam Vaidik Vivaha
विवाह विज्ञान शोध पीठ द्वारा
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हुआ था साथ ही गौना भी हुआ था। विवाह होने ही उसने
प्रसंग का नियम प्रतिदिन का कर दिया और जब कभी स्त्री
अपने माता पिता के यहां चली जाती थी तब वह हस्तक्रिया
किया करता था। कैसे दुःख की बात है कि एक दिन भी उससे
बिना प्रसंग के नहीं रहा जाता था। इस प्रकार १६ से २४ वर्ष
तक उसने अपने जीवन की जड़ को विषय रूपी कुल्हाड़े से इस
प्रकार काटा था कि अब जीवन रूपी वृक्ष गिरना ही चाहता था।
जिस समय मेरे पास वे दोनों स्त्री पुरुष इलाज कराने आये थे
उस समय भी उनकी यही दशा थी कि स्त्री पुरुष दोनो रोगी
होने पर भी दस पन्द्रह दिन तक भी बिना संभोग किये नहीं
रह सकते थे।
मैंने उस रोगी पुरुष का फार्म देखकर स्त्री से कहा कि अगर
तुम्हारे पति ने यह आदत न छोड़ी तो वह आराम हो नहीं सकता
और कुछ दिनों में इससे भी खराब दशा हो जावेगी क्योंकि
अधिक विषय और हस्तक्रिया के कारण उनके शरीर में कुछ भी
तत्व नहीं रहा था अब उन्हें कम से कम एक वर्ष तक ब्रह्मचर्य से
रहना चाहिये। वह बेचारी रोने लगी और बोली-मैं उन्हें ऐसा
मौका न दूंगी परन्तु हस्तक्रिया का मैं क्या उपाय करूंगी उनका
स्वभाव तो ऐसा होगया है कि मासिकधर्म के दिनों में भी सन्तोष
नहीं करते और बीमारी की दशा में भी नहीं मानते। यद्यपि शक्ति
उनके शरीर में नहीं है परन्तु बिना इच्छा भी अपनी आदत
नहीं छोड़ते। मैंने औषधि देकर बहुत सावधान कर दिया। वे दोनों
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