विवाह विज्ञान और कामशास्त्र (दाम्पत्य मनोविज्ञान, शारीरिक-मानसिक सामंजस्य एवं सम्पूर्ण विवाह विज्ञान)
Vivah Vigyan Aur Kam Shastra: Dampatya Manovigyan evam Vaidik Vivaha
विवाह विज्ञान शोध पीठ द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें१४४ आनन्द मन्दिर
होना चाहिये। यदि इस जातिका पुरुष न होगा तो दाम्पत्य प्रेम
का अभाव रहेगा और सन्तान भी ठीक न होगी इसी प्रकार
चारों को समझिये। योग्य जोड़े से दाम्पत्य प्रेम का दोनों को
आनन्द प्राप्त होगा और सन्तान भी उत्तम होगी।
दाम्पत्य कलह का दूसरा कारण
स्त्री और पुरुष दोनो की गुप्त इन्द्रियां अनेक प्रकार के
आकार की होती है। जैसे पद्मिनी स्त्री की गुप्त इन्द्रिय की
गहराई छै अंगुल और उसी हिसाव से शशक जाति के पुरुष की
इन्द्री की लम्बाई होती है इस लिये रतिक्रिया और गर्भाधान
क्रिया ठीक होती है। यदि दोनो की इन्द्रियों का ठीक मेल न
मिला तो संभोग सुख की कमी कलह का कारण।हो जाती है।
यदि स्त्री की गुप्त इन्द्री की गहराई अधिक है और पुरुष की
कम है तो सभोग ठीक नही होगा और सन्तान भी न होगी
क्योकि गर्भाधान क्रिया के समय जब पुरुष की इन्द्री स्त्री के
गर्भाशय के मुख से लगजाती है तब गर्भाशय के मुख में पुरुष
का वीर्य जाता है। यदि गर्भाशय के मुख तक पुरुष की इन्द्री
न पहुच सकी तो गर्भ नही रहता, न स्त्री की तृप्ति होती है।
गर्भाधान के लिये और दाम्पत्य प्रेम का सुख पाने के लिये
ही ऊपर लिखे चार जाति के स्त्री पुरुषो का उचित मेल शास्त्र-
कारो ने वतलाया है क्योकि जब रतिक्रिया के समय पुरुष की
इन्द्री छोटी होने से स्त्री की इच्छा पूरी न होगी तो दाम्पत्य प्रेम