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विवाह विज्ञान और कामशास्त्र (दाम्पत्य मनोविज्ञान, शारीरिक-मानसिक सामंजस्य एवं सम्पूर्ण विवाह विज्ञान)

विवाह विज्ञान और कामशास्त्र (दाम्पत्य मनोविज्ञान, शारीरिक-मानसिक सामंजस्य एवं सम्पूर्ण विवाह विज्ञान)

Vivah Vigyan Aur Kam Shastra: Dampatya Manovigyan evam Vaidik Vivaha

विवाह विज्ञान शोध पीठ द्वारा

DevanagariHindipublished704 पृष्ठ

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पृष्ठ 109

५८ भूमिका
एक दिन कामी कीचक ने एकान्त का मौका पाकर अपना
नीच प्रस्ताव उसके सामने रखा । वे सहम गईं, बोलीं—आप
इतने यशस्वी और प्रतापी मेरे पिता के समान होकर ये कैसी बाते
कर रहे हैं ? आगे से आप कभी इस प्रकार बात चीत करने का
साहस भी न करे ।
एक दिन फिर मौका पाकर कीचक ने द्रौपदी से कहा—
यदि सीधे रास्ते पर न आई तो जबर्दस्ती की जायगी ।
सती द्रौपदी की आखे क्रोध से लाल होगईं । उन्होंने बड़े
तीव्र शब्दो से कीचक को फटकारा और धिक्कारा ।
उनका उग्र रूप देखकर कीचक कुछ सहम गया फिर अभि-
मान वश अपने बल का स्मरण कर बलात्कार करने के लिये
द्रौपदी की ओर झपटा ।
कीचक ने आगे कदम बढ़ाया ही था कि कान मे आवाज
पड़ी–रे नीच कामी ! ठहर, देख तेरा काल मै आगया । कीचक ने
सामने देखा तो भीम एक पेड़ लिये आरहे थे । भीम ने आकर कीचक
को उठाकर दे पटका और उसकी जीवन लीला वही समाप्त करदी ।
इसी प्रकार अनेक पुरुष पर स्त्री की इच्छा करने से मारे
गये । चाहे कितना ही बलवान साहसी यशवान विद्वान पराक्रमी
कोई भी हो, अधर्म का फल उसे अवश्य मिलता है ।
जब देवताओ और बड़े बड़े योद्धाओ को भी पर स्त्री की
इच्छा करने से प्राणो तक का दण्ड मिला तो साधारण पुरुषो की
क्या गिनती है । इसलिये पर स्त्री गमन से दूर रहना चाहिये ।