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विनय पत्रिका (सटीक - गीताप्रेस)

विनय पत्रिका (सटीक - गीताप्रेस)

Vinaya Patrika with Commentary - Gita Press

गोस्वामी तुलसीदास द्वारा

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साहिब उदास भये दास खास ४२८ | हरति सब आरती आरती रामकी ८७
सिव सिव होइ प्रसन्न १० | हरनि पाप त्रिविध ताप २९
सुनु मन मूढ़ सिखावन मेरो १७० | हरि सम आपदा-हरन ३५६
सुनि सीतापत्ति सील सुभाउ १८८ | हरि तजि और भजिये काहि ३६३
सुनहु राम रघुबीर गुसाईं २५६ | हरि तुम बहुत अनुग्रह कीन्हों १९३
सुमिरु सनेह सों तू नाम १४८ | हे हरि, कवन दोष तोहिं दीजै २११
सुमिरु सनेह-सहित सीतापत्ति २२३ | हे हरि कवन जतन सुख मानहुँ २१२
सेइये सुसाहिब राम सो २७७ | हे हरि कवन जतन भ्रम भागै २१३
सेइय सहित सनेह देह-भरि ३२ | हे हरि कस न हरहु भ्रम भारी २१४
सेवहु सिव चरन सरोज रेनु १८ | हे हरि यह भ्रमकी अधिकाई २१५
सोइ सुकृती सुचि साँचो ३९४ | है नीको मेरो देवता २००
सो धौं को जो नाम लाज तें २५८ | है प्रभु मेरोई सब दोषु २७९
हौं सब बिधि राम रावरो २६२