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विनय पत्रिका (सटीक - गीताप्रेस)

विनय पत्रिका (सटीक - गीताप्रेस)

Vinaya Patrika with Commentary - Gita Press

गोस्वामी तुलसीदास द्वारा

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पृष्ठ 426

विनय-पत्रिका ४१५
रामका नाम लेनेसे) औरोंकी तो बात ही क्या, तुलसी-सरीखे (पामर) भी तर
जाते हैं ॥४॥
विशेष
१—'जानिबो तिहारे हाथ'—गुसाईंजीने रामचरितमानसमें भी यही बात
लिखी है:—
‘सो जानै जेहि देहु जनाई । जानत तुम्हहि तुम्है है जाई ॥’
२—'छ-मत'—छ शास्त्र; वैशेषिक, न्याय, सांख्य, योग, पूर्वमीमांसा
और उत्तरमीमांसा ।
१. वैशेषिकके प्रतिपादक कणाद हैं।
२. न्यायके प्रतिपादक गौतम हैं।
३. सांख्यके प्रतिपादक कपिल हैं।
यथा—
‘कणादेन च संप्रोक्तं शास्त्रं वैशेषिकं महत् ।
गौतमेन तथा न्यायं सांख्यन्तु कपिलेन तु ॥
४. योगके प्रतिपादक पतंजलि हैं।
५. पूर्वमीमांसाके प्रतिपादक जैमिनि हैं।
६. उत्तरमीमांसाके प्रतिपादक व्यास हैं।
[ २५२ ]
बाप ! आपने करत मेरी घनी घटि गई।
लालची लबार की सुधारिये बारक बलि,
रावरी भलाई सब ही की भली भई ॥१॥
रोगबस तनु, कुमनोरथ मलिन मन,
पर-अपवाद मिथ्या-बाद वानी हई।
साधन की ऐसी बिधि, साधन बिना न सिधि,
विगरी बनावैं कृपानिधि की कृपा नई ॥२॥
पतित-पावन, हित आरत-अनाथनि को,
निराधार को अधार दीनबन्धु दई।