विनय पत्रिका (सटीक - गीताप्रेस)
Vinaya Patrika with Commentary - Gita Press
गोस्वामी तुलसीदास द्वारा
पृष्ठ 3, कुल 475 में से
संदर्भ में पढ़ेंद्वितीय संस्करणके सम्बन्धमें
'विनयपत्रिका'का द्वितीय संस्करण पाठकोंके समक्ष उपस्थित है । आचार्य
विनोबा भावेको यह टीका बहुत पसन्द आयी थी । इसका प्रथम संस्करण
जिन परिस्थितियोंमें प्रकाशित हुआ था, उसमें त्रुटियोंका रह जाना स्वाभाविक
था । इस संस्करणमें उन्हें दूर करने की पूरी चेष्टा की गयी है । इसके सिवा अनेक
स्थलोंपर जहाँ भाव समझनेमें जरा भी संशय या कठिनाई मालूम होती थी,
उचित परिष्कार कर दिया गया है । इस कार्यमें हमें श्री शारदाशङ्कर द्विवेदीसे
यथेष्ट सहायता मिली है । एतदर्थ वह धन्यवादके पात्र हैं । इस संस्करणमें कठिन
शब्दोंके अर्थ भी बढ़ा दिये गये हैं जिनसे पुस्तककी उपयोगिता बहुत बढ़
गयी है ।
पहले संस्करणमें इस पुस्तकका यथेष्ट प्रचार नहीं किया जा सका, अन्यथा
अबतक इसके कई संस्करण हो चुके होते । हमें पूर्ण विश्वास है कि भक्तजन इस
द्वितीय संस्करणका समुचित आदर करेंगे ।
भाद्रपूर्णिमा, }
सं० २०१ ९ विक्रमी । } देवनारायण द्विवेदी