विज्ञान भैरव तन्त्र (११२ ध्यान धारणाएँ - हिन्दी व्याख्या सहित)
Vijnana Bhairava Tantra with Hindi Commentary
भगवान भैरव / प्रो. ब्रजवल्लभ द्विवेदी द्वारा
स्रोत: मोतीलाल बनारसीदास / चौखम्बा · मोतीलाल बनारसीदास / चौखम्बा · 1950 (उद्गम)
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संदर्भ में पढ़ेंपातञ्जलयोगदर्शनम्
स्वामी हरिहरानन्द आरण्य
स्वामी हरिहरानन्द का 'बंगला-योगदर्शन' पातञ्जल योग-सूत्र के व्यास-भाष्य
का बंगला रूपान्तर है । प्रस्तुत कृति स्वामी जी के शिष्यों द्वारा किये गए हिन्दी
रूपान्तर का संशोधित संस्करण है जिसमें डा० रामशंकर भट्टाचार्य ने आवश्यक
परिवर्तन और परिवर्धन भी किया है ।
काल और देश पर परिशिष्ट के साथ विशिष्ट शब्दों और विषयों की अनुक्रमणी
भी जोड़ दी गई है । (अजिल्द) २०.०० ; (सजिल्द) ३०.००
जीवन योग
विमला ठकर
“जीवन तो योग है, वह जीवन रसिकों का काम है”, ये शब्द हैं विमला जी के,
जो जीवन को प्रभु कहती हैं । उनके पास कोई जीवन-पद्धति या कोई बना-बनाया
ढांचा नहीं है । मानव को वैसा कोई ढांचा देने का यत्न उनकी दृष्टि में मानव का
अपमान है । जिज्ञासा की ज्योति अखण्ड जलती रहे और दायित्व की, जिम्मेदारी
की मशाल हाथ में ली हो तो बाकी सब कुछ जीवन प्रभु स्वयं देख लेगा, ऐसा उनका
कहना है ।
मानव-चेतना में उत्क्रान्ति की बात, मन के चेतन, अचेतन अवचेतनस्तरों
का विश्लेषण, “समाधि” तक आरोह और पुनः इन्द्रियों के स्तर पर उस अवस्था
का अवरोह — इन सब का विशद, सुस्पष्ट और अनुभवसिद्ध वर्णन विमला जी की
वाणी में मिलता है ।
इस पुस्तक में उनके तेरह प्रवचनों और आठ प्रश्नोत्तरियों का संकलन है ।
इनमें जीवन का रस शब्दों में उंडेलकर विज्ञों के समक्ष परोसा गया है । जिन्हें जीवन
में रुचि हो, उनके लिए यह क्रांतिकारी वाणी परम उपादेय होगी । यहां न निषेध
का आग्रह मिलेगा, न परम्पराओं का खण्डन मिलेगा, न मण्डन । इन सब द्वन्द्वों से
अतीत अनुभव के अमृत-रस-पान की जिन्हें इच्छा हो, सत्य की जिज्ञासा हो, वे इस
पुस्तक को अवश्य देखें । रु० १०.००
योगप्रदीपिका
( हिन्दी भाष्य सहित )
ब्रह्मचारी याज्ञवल्क्य प्रणीत
श्री आदिनाथ, मत्स्येन्द्रनाथ, गोरक्षनाथ, आनन्दभैरव आदि हठयोगप्रवर्तक
आचार्यों में प्रस्तुत कृति के रचयिता स्वात्माराम योगी का नाम विख्यात है ।
पातञ्जल योगदर्शन के अनुसार आत्मदर्शन के लिये राजयोग चरम साधन
है । किन्तु राजयोग की प्राप्ति के लिये हठयोग की साधनायें आवश्यक हैं । योग-
साधना के अन्तरङ्ग और बहिरङ्ग साधनों में हठयोग का बहिरङ्ग में समावेश हो
जाता है ।
प्रस्तुत पुस्तक चार उपदेशों में विभक्त है । प्रथम उपदेश में वीर, कूर्म आदि
योगासनों का विवरण है । द्वितीय उपदेश में प्राणायाम के विविध प्रकार हैं । तृतीय
उपदेश में कुण्डलिनी-जागरणार्थ महामुद्राओं की विधि है । चतुर्थ उपदेश में शांभवी,
उन्मनी, खेचरी आदि महामुद्राओं के साथ-साथ नादावस्था आदि योग-सामग्री का
संग्रह है । रु० ३.५०
मोतीलाल बनारसीदास
दिल्ली ☐ वाराणसी ☐ पटना