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सर्वकोश
वेणीसंहारम् (भट्ट नारायण - संस्कृत मूल एवं सान्वय हिन्दी व्याख्या)

वेणीसंहारम् (भट्ट नारायण - संस्कृत मूल एवं सान्वय हिन्दी व्याख्या)

Venisamhara Nataka of Bhatta Narayana with Commentary

भट्ट नारायण द्वारा

DevanagariHindipublished355 पृष्ठ

पृष्ठ 18, कुल 355 में से

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पृष्ठ 18

जायगा। पिताजी ! आप आशीर्वाद दीजिए। वत्स वीर दुःशासनके रक्तको
पीनेवाले शत्रु भीमको मारकर ही मैं युधिष्ठिरकी प्रतिज्ञा पूरी करूँगा।
इतने में कौरवसेनाकी चीत्कारोंसे दिशायें गूँज उठीं। महासमरसे रोते
हुए शल्यके पलायनसे विदित हो गया कि अर्जुनके वज्रसम गाण्डीवके
वज्रपातसे महारथी कर्ण धराशायी हो गये। यह सुन हाय प्रियमित्र कर्ण !
कहते हुए दुर्योधन पृथिवीपर गिर पड़े और माता-पिता उन्हें आलिङ्गन कर
धैर्य देने लगे। इसी अवसर पर दुर्योधनको ढूँढ़ते हुए अर्जुनके साथ भीम भी
वहाँ पहुँच गये और दोनों भाई माता गांधारीके साथ धृतराष्ट्रको उपस्थित
देख चकित होकर सदाचारके अनुकूल उन्हें प्रणाम कर दुर्योधनको धिक्कारने
लगे। दुर्योधन भी तमक उठे। दोनों पक्षोंमें बढ़-बढ़कर बातें होने लगीं।
अन्तमें क्रोधावेशमें आकर भीमने कहा—अरे भरतवंशके कलङ्क ! अब मेरी
सभी प्रतिज्ञायें पूरी हो चुकी हैं, केवल तेरी जांघोंको इस गदा से विदीर्ण कर
तेरे रक्तसे अपने शरीरको रञ्जित करना ही बाकी है, उसे भी आर्य धृत-
राष्ट्रके समक्ष होनेसे अभी नहीं तो कल सवेरे अवश्य पूरा करूँगा। यह
कहकर बड़े भाई धर्मराज युधिष्ठिरका आह्वान सुन दोनों भाई शिविरकी
ओर चले गये। तदुपरान्त कर्णका वध सुनकर अर्जुनको ललकारते हुए
अश्वत्थामा उपस्थित होकर कहने लगे—कौरवनरेश ! आपने अपने प्रिय
मित्र कर्णका पराक्रम तो देख लिया, अब उसका प्रतिशोध लेनेके लिये मुझे
आज्ञा दीजिये। मैं तिनकेके समान अर्जुनके गाण्डीवको ध्वस्त कर क्षणमात्रमें
पाण्डवोंकी गर्दन काटे डालता हूँ। यह सुन दुर्योधन व्यथित हो उठे और
कहने लगे—आचार्यपुत्र ! धनुर्धर क्षत्रियवीर अङ्गराज प्रियमित्र कर्णके
विनाशसे जितने आप सुखी हैं, उतना ही मैं दुःखी हूँ। अतः आपका यह
मनोरथ मेरे विनाशके बाद पूरा हो तो अच्छा।
षष्ठ अङ्क
महाभारत संग्रामके अन्तिम दिन सवेरे दीर्घश्वास लेते हुये युधिष्ठिरने
कहा—'आह ! भीमने प्रतिज्ञा कर ली है कि यदि सवेरे दुर्योधन नहीं मारा
गया तो अपना ही प्राण परित्याग कर दूँगा'। इस समाचारसे न जाने दुर्योधन
कहीं छिप गया है। इसी समय पांचालक पहुँच कर कहने लगा—'महाराज-