वेदान्तसार (सदानन्द योगीन्द्र - विद्वन्मनोरञ्जनी व हिन्दी व्याख्या सहित)
Vedantasara of Sadananda with Hindi Commentary
सदानन्द योगीन्द्र द्वारा
स्रोत: चौखम्बा संस्कृत संस्थान · चौखम्बा संस्कृत संस्थान (उद्गम)
पृष्ठ 309, कुल 314 में से
संदर्भ में पढ़ेंपरिशिष्ट २९५
26. अधिकारी एवं गुरु का परस्पर व्यवहार 149
27. अध्यारोप 151
28. अज्ञान का स्वरूप 154
29. समष्टि-व्यष्टि व्याख्या 156
30. अज्ञान की समष्टि 159
31. अज्ञान की व्यष्टि 164
32-33. सुषुप्ति अवस्था में आनन्दानुभूति 168
34. समष्टि-व्यष्टि का अभेद 170
35. शुद्धचैतन्य-तुरीय अवस्था 172
36. अज्ञान की शक्तिद्वय (आवरण-विक्षेप) 175
37. आवरण-विक्षेपशक्ति का उदाहरण 175
38. अज्ञान से उपहितचैतन्य का उपादान एवं निमित्तकारण होना 181
39. स्थूलभूतों की उत्पत्ति 184
40. सूक्ष्मशरीर, कोशत्रय-कर्ता, करण, क्रियारूप 195
41. पञ्चीकरण की प्रक्रिया 201
42. त्रिवृत्तकरण 203
43-44. स्थूलशरीर की समष्टि-व्यष्टि 209 212
45. महाप्रपञ्च वाच्यार्थ लक्ष्यार्थ 215
46. आत्माविषयक तर्क एवं अनुभव 220
47. प्रत्यगात्मा विषयक तर्क एवं अनुभव 224
48. सृष्टिविलय की प्रक्रिया 228
49. तत्त्वमसि वाक्य, अभिन्नता की प्रतीति 232
50. तत्त्वमसि में सम्बन्धत्रय 235
51. तत्त्वमसि में नीलमुत्पलम् के समान
विशेषणविशेष्यसम्बन्धाभाव 239
52. तत्त्वमसि में जहल्लक्षणा का अनौचित्य 243
53. तत्त्वमसि में अजहल्लक्षणा की भिन्नता 247
54. तत्त्वमसि में भागलक्षणा 249