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वापी-कूप-तड़ाग-प्रतिष्ठा पद्धति (प्राचीन भारतीय बावड़ी, कूप व जलाशय निर्माण स्थापत्य)

वापी-कूप-तड़ाग-प्रतिष्ठा पद्धति (प्राचीन भारतीय बावड़ी, कूप व जलाशय निर्माण स्थापत्य)

Vapi Kupa Tadaga Pratishtha Paddhati

प्राचीन भारतीय जल-स्थापत्य परम्परा द्वारा

DevanagariSanskritpublished30 पृष्ठ

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प्र० १५
समाप्त
212
तोरण नाम वंदरवाल को है धजा पताका पू० पत्र १ से पूत कहैं ॥
लिंग को पूजन उत्सर्ग प्रकृत गंगा द्वितीय जल गेरो पत्र ११ है ॥
आराम प्रतिष्ठा में इंद्र का मंत्र १ और वरुण गायत्री २ और वायु मंत्र ३ यह ३ मंत्र जपे ॥
॥ इति श्री वापी कूप तडाग राम नाम प्रतिष्ठा विम मकर म ॥ धिः ॥
आराम प्रतिष्ठा पत्र
इस प्रतिष्ठा में कर्ण वेध न० और अंजन यह कृत्य पत्र १३५ पर है ॥
तर्पण पत्र ८ पर ह यजमान से कराना
अंग जल गेरे रो पत्र १० पर है
श्री० प्र० क्र० ११
सं० १९४८
नाग का रो पत्र ८५० नगर देवल होरेण ॥
र्गे जला पण का उसर्ग करा व पत्र २० पर है
इंद्र का मंत्र लच्छी दरी में पत्र २१ पर है
१ ब्रम्हा गायत्री
२ गणेश गायत्री
३ वरुण का मंत्र
४ वायु मंत्र
यह ४ मंत्र प्रवृक्ष जपए चाहैं
ये कूप प्रतिष्ठा मे

बायाँ पार्श्व (Vertical text on the left margin):
१५ ॐ द्यौः शान्तिरन्तरिक्षँ शान्तिः पृथिवी शान्तिरापः शान्तिरोषधयः शान्तिः वनस्पतयः शान्तिर्विश्वेदेवाः शान्तिर्ब्रह्म शान्तिः सर्वँ शान्तिः...

दायाँ पार्श्व (Vertical text on the right margin):
ॐ नमो वो देवा अतिथयः प्रचेतसो मन्द्राः सुजिह्वा उप संधिनः प्रति मे...
वास्तोष्पते प्रति जानीह्यस्मान्त्स्वावेशो अनमीवो भवा नः...
१५