वाक्यपदीयम्: ब्रह्मकाण्ड (भर्तृहरि - शब्दब्रह्म, स्फोट-सिद्धान्त एवं भाषा-दर्शन सटीक)
Vakyapadiya Brahmakanda of Bhartrihari with Commentary
भर्तृहरि (टीकाकार: पं. सूर्यनारायण शुक्ल) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें" no!
"का" "ले" "न" = "कालेन"?
Wait: "कालेन" or "कार्ये न"?
Look at the first letter: "का", then "ले", then "न" -> "कालेन"!
Then: "द" or "दो"? "दोषः"!
"कालेन दोषः"! WOW.
Look at: "कालेन दोषः"!
Let's see: "का" "ले" "न" "दो" "षः" -> wait, after दोषः:
"कालत्वादि..." wait: "कालत्वादिधर्मिनित्यत्वात्"? Or "कालत्वादिधर्मित्वात्"?
Wait! Let's read carefully:
"काले न दोषः" or "कालेन दोषः"
Then: "कालत्वादिधर्मि..." what?
Let's look at the letters after "काले न दोषः":
"कालत्वादिधर्मिनित्यत्वादिति"?!
Look at:
"का" (kā)
"ल" (la)
"त्वा" (tvā)
"दि" (di)
"ध" (dha) with repha? "धर्मि" (dharmi)
"नि" (ni)
"त्य" (tya)
"त्वा" (tvā)
"दि" (di)
"ति" (ti) -> "कालत्वादिधर्मिनित्यत्वादिति"!
YES! "कालत्वादिधर्मिनित्यत्