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सर्वकोश
वाक्यपदीयम्: ब्रह्मकाण्ड (भर्तृहरि - शब्दब्रह्म, स्फोट-सिद्धान्त एवं भाषा-दर्शन सटीक)

वाक्यपदीयम्: ब्रह्मकाण्ड (भर्तृहरि - शब्दब्रह्म, स्फोट-सिद्धान्त एवं भाषा-दर्शन सटीक)

Vakyapadiya Brahmakanda of Bhartrihari with Commentary

भर्तृहरि (टीकाकार: पं. सूर्यनारायण शुक्ल) द्वारा

DevanagariHindipublished192 पृष्ठ

पृष्ठ 35, कुल 192 में से

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पृष्ठ 35

"? No, why would it be "अक्षरस्य"?
Wait, what if it is:
"अक्षरम्—अविभक्तककारादिवर्णरूपाया"?
No, look:
यद् अक्षरम्—
Then:
अ (a)
क्ष (ksha)
र (ra)
Then: स्य (sya)??
Wait, could it be:
"अक्षरम्—अक्षरं न क्षरतीति"? No.
Let's look really closely at:
यद् अक्षरम्—अक्षरस्य विभक्तककारादिवर्णरूपाया
Wait, could it be "अक्षरस्य विभक्तककारादिवर्णरूपाया"?
Wait, in Hindi translation (line 18):
"जो (ककारादिरूप) वर्णोंका कारण होते हुए भी"
"वर्णों का कारण" = ककारादिवर्णरूपाया वैखर्या वाचो निमित्तम्!
And in Sanskrit:
"यद् अक्षरम्—अक्षरस्य विभक्तककारादिवर्णरूपाया वैखर्या वाचो निमित्तं, सत्"
Wait, why "अक्षरस्य"?
Wait! Could it be: "अक्षरम्—अक्षरं, विभक्तककारादिवर्णरूपाया वैखर्या वाचो निमित्तं सत्"?
Look at the letter after 'र':
Wait! Is it 'स्य'?
Look:
अ - क्ष - र - म् - ?
Wait, it has a halanta 'म्'?