वाक्यपदीयम्: ब्रह्मकाण्ड (भर्तृहरि - शब्दब्रह्म, स्फोट-सिद्धान्त एवं भाषा-दर्शन सटीक)
Vakyapadiya Brahmakanda of Bhartrihari with Commentary
भर्तृहरि (टीकाकार: पं. सूर्यनारायण शुक्ल) द्वारा
पृष्ठ 112, कुल 192 में से
संदर्भ में पढ़ें..."
Wait! Let's re-examine that word:
"वर्णावयवावयवेनाभिमत जो यावद् वर्ण"
Is it "वर्णावयवावयवेनाभिमत" or "वर्णावयवेनावयवेनाभिमत"?
Let's read the characters:
व (va)
र्णा (rṇā)
व (va)
य (ya)
वा (vā)
व (va)
य (ya)
वे (ve)
ना (nā)
भि (bhi)
म (ma)
त (ta)
Wait, "वर्णावयवावयवेनाभिमत":
Let's check:
वर्णा - व - य - वा - व - य - वे - ना - भि - म - त
Yes, exactly! "वर्णावयवावयवेनाभिमत" - wait, look at 'त':
The bottom of 'त' is clear, it's 'त'!
Then "जो यावद् वर्ण तन्निष्ठा-"
Look at :
"त्यन्ताभाव प्रतियोगीत्व वर्णावयव में है और दूसरा 'अधिष्ठानसत्तातिरिक्तसत्ताशून्यत्व'रूप है।"
Wait, "प्रतियोगीत्व" has a space before it?
"त्यन्ताभाव प्रतियोगीत्व" - yes, there is a space.
Look at :
"'ग्रामशब्दोऽयं बह्वर्थः' इति, सर