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वैयाकरण सिद्धान्त कौमुदी (भट्टोजि दीक्षित - बालमनोरमा व तत्त्वबोधिनी टीका सम्पूर्ण पूर्वार्ध)

Vaiyakarana Siddhanta Kaumudi of Bhattoji Dikshita with Commentary

भट्टोजि दीक्षित (टीकाकार: वासुदेव दीक्षित एवं ज्ञानेन्द्र सरस्वती) द्वारा

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DevanagariHindipublished835 पृष्ठ

इस ग्रन्थ के बारे में

वैयाकरण सिद्धान्तकौमुदी सत्रहवीं शताब्दी के वैयाकरण भट्टोजि दीक्षित की रचना है, जिसमें पाणिनि की अष्टाध्यायी के सूत्रों को उनके मूल क्रम से हटाकर विषयों के अनुसार प्रकरणों में सजाया गया है। इस व्यवस्था के कारण यह ग्रन्थ पारम्परिक पाठशालाओं में संस्कृत व्याकरण सीखने का मुख्य आधार बन गया।

यह खण्ड कौमुदी का पूर्वार्ध है। सूची के अनुसार इसमें वासुदेव दीक्षित की 'बालमनोरमा' और ज्ञानेन्द्र सरस्वती की 'तत्त्वबोधिनी' टीकाएँ हैं, जो कौमुदी पर सबसे अधिक पढ़ी जाने वाली व्याख्याएँ हैं। आरम्भिक पृष्ठों पर जयपुर के महाराज रामसिंह और माधवसिंह के प्रति कृतज्ञता के श्लोक हैं, जिनमें टिप्पणीकार अपना परिचय जयपुर निवासी महामहोपाध्याय पं० शिवदत्त शर्मा दाधिमथ के रूप में देते हैं।

पूर्वार्ध के प्रमुख प्रकरण:

  • माहेश्वर सूत्र, संज्ञा और परिभाषा
  • अच्, हल् और विसर्ग सन्धि
  • कारक प्रकरण, प्रथमा से सप्तमी विभक्ति तक
  • अव्ययीभाव, तत्पुरुष, बहुव्रीहि और द्वन्द्व समास

८३५ पृष्ठों का यह ग्रन्थ उन्नत व्याकरण-अध्येताओं के लिए है, जो सूत्र, वृत्ति और टीका को साथ-साथ पढ़ना चाहते हैं।