वैयाकरण सिद्धान्त कौमुदी (भट्टोजि दीक्षित - बालमनोरमा व तत्त्वबोधिनी टीका सम्पूर्ण पूर्वार्ध)
Vaiyakarana Siddhanta Kaumudi of Bhattoji Dikshita with Commentary
भट्टोजि दीक्षित (टीकाकार: वासुदेव दीक्षित एवं ज्ञानेन्द्र सरस्वती) द्वारा
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४६८ पुरः कुषन् | ४६५ भन्देनंलोपश्च | साक्षाशस्थिभ्यो यः
४७३ पुरसि च | ४५४ भातेर्डवतुः | मिथिलादयश्च
४७३ पुरूरवाः | ५५९ भियःकुकन् | मियुने मनिः
४७२ पुवो ह्रस्वश्च | ५५६ भियः पुग्वा | ४६९ ॰ट्स्नि०
४६७ पुषः कित् | ४५६ भियः पुग्रस्वश्च | ४५४ मी० कः
४७४ पूजो यंण्णुक् ह्रस्वश्च | ४६२ भुजिमृद्भ्यां० | ५५३ मुकुरदौ
४७३ पूर्ववच्च सर्वम् | ४७१ भुजेः किच्च | ४५६ मुदिग्रोर्गुगौ
४६५ पृषिरञ्जिभ्यां कित् | ४६३ भुवो झिच | ४५९ मुपेर्दीर्घश्च
४६८ पुनाकेलिम्ब्य० | ४६७ भुवश्च | ४६१ मुहेः किच्च
४५२ पृभिदिव्यधिगृधि० | ४६१ भुवः कित् | ४७४ मुहेः खो मूर्ध्न
४७० प्र ईर शदोस्तुट् च | ४६८ भुवः कित् | ४५४ मूलेरादयः
४५२ प्रथिप्रदिभ्रजां० | ४