सामग्री पर जाएँ
सर्वकोश
वैयाकरण सिद्धान्त कौमुदी (भट्टोजि दीक्षित - बालमनोरमा व तत्त्वबोधिनी टीका सम्पूर्ण पूर्वार्ध)

वैयाकरण सिद्धान्त कौमुदी (भट्टोजि दीक्षित - बालमनोरमा व तत्त्वबोधिनी टीका सम्पूर्ण पूर्वार्ध)

Vaiyakarana Siddhanta Kaumudi of Bhattoji Dikshita with Commentary

भट्टोजि दीक्षित (टीकाकार: वासुदेव दीक्षित एवं ज्ञानेन्द्र सरस्वती) द्वारा

कॉपीराइट समस्या बताएँ

DevanagariHindipublished835 पृष्ठ

पृष्ठ 781, कुल 835 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 781

लिटः कानन्वा ३ । २ । १०६ (४४४।४९९)
What is line 1 of Column 2?
Wait!
"५०१ लि ङ् स्य सि चो ड् ३ । १ । ८५" ???
Wait! On page 501, what sutra is there?
Page 501 is Vedic (छान्दस) or तिङन्त?
Wait, page 500 has: "लिङर्थे लेट् ३ । ४ । ७"!
Page 501 is right after page 500, which is लेट् लकार (Vedic)!
In Vedic लेट्:
3.1.85 is "व्यत्ययो बहुलम्"!
What sutra in 3.1 is on page 501?
3.1.34: सिब्बहुलं लेटि!
3.1.85: व्यत्ययो बहुलम्!
Wait, what sutra is:
"लि ङो ल ण् सि चो ङ्"?
Wait, look at 3.1.85:
Is there a sutra: "लिङ्यभ्यासस्य"? No.
Let's read the letters in line 1 of column 2:
लि
ङ्
(or ल्)
Then:
ध्य or व्य or च्य?
Wait: लि ङ् व्य च्छि ङ् ३ । १ । ८५ ??
Wait! 3.1.85 is