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सर्वकोश
वैयाकरण सिद्धान्त कौमुदी (भट्टोजि दीक्षित - बालमनोरमा व तत्त्वबोधिनी टीका सम्पूर्ण पूर्वार्ध)

वैयाकरण सिद्धान्त कौमुदी (भट्टोजि दीक्षित - बालमनोरमा व तत्त्वबोधिनी टीका सम्पूर्ण पूर्वार्ध)

Vaiyakarana Siddhanta Kaumudi of Bhattoji Dikshita with Commentary

भट्टोजि दीक्षित (टीकाकार: वासुदेव दीक्षित एवं ज्ञानेन्द्र सरस्वती) द्वारा

DevanagariHindipublished835 पृष्ठ

पृष्ठ 732, कुल 835 में से

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पृष्ठ 732

"? फ ग स्य ो च्च: फगस्योच्च!

  • "७०५ स्पृशः श्वणश्चुनौ पृ"
    Wait, "श्वणश्चुनौ पृ" -
    Look at the characters:
    श्व (śva) ण (ṇa) श्चु (ścu) नौ (nau) पृ (pṛ)
    Wait, is it श्वणश्चुनौ or श्वनश्चुनौ?
    It has ण: श्वणश्चुनौ.
    And at the end of line 19: 'पृ' (connected to 'च' in next line: पृच्? Or पृ / च ?).

Line 20:
"च । ७०६ रमनि श्रयतेर्डुन् । ७०७ अश्वादयश्च । ७०८ जनेष्ट्रन् लोपश्च । ७०९ अच्च"
Wait!
First word: "च ।"
Wait, पृ + च = पृच?
In line 19 it ends with "पृ", line 20 starts with "च ।"
Wait, is it "पृच ।" or "पृ च ।"? In line 19 "पृ" has no hyphen, then line 20 has "च ।". Let's write पृ at end of L19 and च । at start of L20.

  • "७०६ रमनि श्रयतेर्डुन् ।"
    Wait, is it "रमनि" or "रवनि" or "रमने"?