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सर्वकोश
वैयाकरण सिद्धान्त कौमुदी (भट्टोजि दीक्षित - बालमनोरमा व तत्त्वबोधिनी टीका सम्पूर्ण पूर्वार्ध)

वैयाकरण सिद्धान्त कौमुदी (भट्टोजि दीक्षित - बालमनोरमा व तत्त्वबोधिनी टीका सम्पूर्ण पूर्वार्ध)

Vaiyakarana Siddhanta Kaumudi of Bhattoji Dikshita with Commentary

भट्टोजि दीक्षित (टीकाकार: वासुदेव दीक्षित एवं ज्ञानेन्द्र सरस्वती) द्वारा

DevanagariHindipublished835 पृष्ठ

पृष्ठ 592, कुल 835 में से

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  • मन् + गौरादयः -> द्व्यच्-तु-अजिन-मन् -> द्व्यक्त्व...? No, द्व्यच् + तु -> द्व्यत्तु? No, द्व्यच्-तु? No, द्व्यच्, अजिन, मन्, गौरादयः!)
    Wait, what is the sutra?
    "उपाद्द्व्यचजिन्नमन्गौरादयः" or what?
    Let's look at the sutra:
    Sutra 6.2.194: "उपाद् द्व्यच्त्वजनिमन्गौरादयः" or "उपाद् द्व्यच्वजनिमन्गौरादयः"?
    Look at L21: "उपाद् द्व्यच्वजनिमन्गौरादयः" or "द्व्यच्त्व"?
    Wait, look at L22:
    "उपात्परं यत् द्व्यच्वकमजिनं चान्तोदात्तं" -> wait! "द्व्यच्वकम्" or "द्व्यच्कम्"?
    Wait, the vritti in L22:
    "उपात्परं यत् द्व्यच्वकमजिनं" - wait, no! "द्व्यच्कमजिनं"?
    Wait! Look at the sutra 6.2.194 in Ashtadhyayi:
    "उपाद् द्व्यच्तुदजिनमन्गौरादयः"? No!
    6.2.194 is:
    "उपाद्द्व्यच्त्वजनिमन्ग