वैयाकरण सिद्धान्त कौमुदी (भट्टोजि दीक्षित - बालमनोरमा व तत्त्वबोधिनी टीका सम्पूर्ण पूर्वार्ध)

वैयाकरण सिद्धान्त कौमुदी (भट्टोजि दीक्षित - बालमनोरमा व तत्त्वबोधिनी टीका सम्पूर्ण पूर्वार्ध)
Vaiyakarana Siddhanta Kaumudi of Bhattoji Dikshita with Commentary
भट्टोजि दीक्षित (टीकाकार: वासुदेव दीक्षित एवं ज्ञानेन्द्र सरस्वती) द्वारा
DevanagariHindipublished835 पृष्ठ
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- मन् + गौरादयः -> द्व्यच्-तु-अजिन-मन् -> द्व्यक्त्व...? No, द्व्यच् + तु -> द्व्यत्तु? No, द्व्यच्-तु? No, द्व्यच्, अजिन, मन्, गौरादयः!)
Wait, what is the sutra?
"उपाद्द्व्यचजिन्नमन्गौरादयः" or what?
Let's look at the sutra:
Sutra 6.2.194: "उपाद् द्व्यच्त्वजनिमन्गौरादयः" or "उपाद् द्व्यच्वजनिमन्गौरादयः"?
Look at L21: "उपाद् द्व्यच्वजनिमन्गौरादयः" or "द्व्यच्त्व"?
Wait, look at L22:
"उपात्परं यत् द्व्यच्वकमजिनं चान्तोदात्तं" -> wait! "द्व्यच्वकम्" or "द्व्यच्कम्"?
Wait, the vritti in L22:
"उपात्परं यत् द्व्यच्वकमजिनं" - wait, no! "द्व्यच्कमजिनं"?
Wait! Look at the sutra 6.2.194 in Ashtadhyayi:
"उपाद् द्व्यच्तुदजिनमन्गौरादयः"? No!
6.2.194 is:
"उपाद्द्व्यच्त्वजनिमन्ग