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सर्वकोश
वैयाकरण सिद्धान्त कौमुदी (भट्टोजि दीक्षित - बालमनोरमा व तत्त्वबोधिनी टीका सम्पूर्ण पूर्वार्ध)

वैयाकरण सिद्धान्त कौमुदी (भट्टोजि दीक्षित - बालमनोरमा व तत्त्वबोधिनी टीका सम्पूर्ण पूर्वार्ध)

Vaiyakarana Siddhanta Kaumudi of Bhattoji Dikshita with Commentary

भट्टोजि दीक्षित (टीकाकार: वासुदेव दीक्षित एवं ज्ञानेन्द्र सरस्वती) द्वारा

DevanagariHindipublished835 पृष्ठ

पृष्ठ 547, कुल 835 में से

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पृष्ठ 547

।२।३।६२॥ षष्ठी स्यात् ॥ पुरुषमृगश्चन्द्रमसे गोधाकालकादार्वाघाटस्ते वनस्पतीनाम् ।

Line 30:
वनस्पतिभ्य इत्यर्थः ॥ षष्ठ्यर्थे चतुर्थी वाच्या ॥ * ॥ या खर्वेण पिबति तस्यै खर्वः ॥

Line 31:
३२

Wait, let's re-check line 29:
"गोधाकालकादार्वाघाटस्ते वनस्पतीनाम्"
Wait, "गोधाकालकादार्वाघाटस्ते" or "गोधा कालका दार्वाघाटस्ते"?
In line 29: "गोधाकालकादार्वाघाटस्ते" is printed as one compound / continuous text without space.
Wait, let's check spacing:
"पुरुषमृगश्चन्द्रमसे गोधाकालकादार्वाघाटस्ते वनस्पतीनाम् ।"
Yes, exactly as printed.

Let's double check line 28:
"गामस्य तदहः सभायां दीव्येषुः" or "दीव्येयुः"?
Look at "दीव्येयुः":
द + ई = दी
व + य + े = व्ये
य + ु = यु
ः = ः
Wait, is that 'यु' or 'षु'?
Look at the loop: it's 'यु': "दीव्येयुः".

Let's double check line 12:
"