वैयाकरण सिद्धान्त कौमुदी (भट्टोजि दीक्षित - बालमनोरमा व तत्त्वबोधिनी टीका सम्पूर्ण पूर्वार्ध)
Vaiyakarana Siddhanta Kaumudi of Bhattoji Dikshita with Commentary
भट्टोजि दीक्षित (टीकाकार: वासुदेव दीक्षित एवं ज्ञानेन्द्र सरस्वती) द्वारा
पृष्ठ 485, कुल 835 में से
संदर्भ में पढ़ें" ?
Letters: सि - द्धि - र्न (siddhirna)
Then: न - त्व - स्या - सि - द्ध - त - या (natvasyasiddhataya)
Ah! "सिद्धेर्न नत्वस्यासिद्धतया"!
Let's look at the matra on 'द्ध':
It has e-matra: "सिद्धेर्न" with repha on 'न'!
Yes! "सिद्धेर्न नत्वस्यासिद्धतया"!
Line 30:
"यण्वत्ताविरहात् ॥ ५ ग्रासकर्मकर्तृकस्येति । ग्रास एव कर्मकर्ता यस्येत्यर्थः । पिण्डीक्रियमाण"
Line 31:
"ओदनादिर्घट्टा व्यञ्जनदध्यादिसम्बन्धेन स्वयमेव झटिति ग्रासतां प्राप्नोति तदैतदुदाहरणम् ॥ ६ ग्रासेति"
Wait, "ओदनादिर्घट्टा" or "ओदनादिर्घा"?
Look at line 31: "ओदनादिर्घृष्टो" or "ओदनादिर्घृष्टा"?
Letters:
ओ - द - ना - दि - र् (odanadir)
then: घृ or घा or ध? It has 'घ' with 'ृ'? "घृष्टो"? No, "घृतव्यञ्जन-"!!
YES! Look at the letters:
घृ (ghri) - त (ta) - व्य - ञ्ज -