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सर्वकोश
वैयाकरण सिद्धान्त कौमुदी (भट्टोजि दीक्षित - बालमनोरमा व तत्त्वबोधिनी टीका सम्पूर्ण पूर्वार्ध)

वैयाकरण सिद्धान्त कौमुदी (भट्टोजि दीक्षित - बालमनोरमा व तत्त्वबोधिनी टीका सम्पूर्ण पूर्वार्ध)

Vaiyakarana Siddhanta Kaumudi of Bhattoji Dikshita with Commentary

भट्टोजि दीक्षित (टीकाकार: वासुदेव दीक्षित एवं ज्ञानेन्द्र सरस्वती) द्वारा

DevanagariHindipublished835 पृष्ठ

पृष्ठ 465, कुल 835 में से

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" ?
Wait, could it be "साक्षात्साधुत्वेतरधर्मारोपग्राहकत्वं"?
Let's look at the matra:
Is it an e-matra on त्वा?
No, it's त्वा with an e-matra: 'त्वे'?
Wait, look at line 27:
"एवं “साक्षात्साधुत्व अत्यन्ताप्राप्तकार्यसम्पादकत्वं विधित्वम् ॥"
Notice how line 27 has a space between "साक्षात्साधुत्व" and "अत्यन्ताप्राप्त"!
In line 28:
Is it "साक्षात्साधुत्वेतरधर्मारोपग्राहकत्वं"?
Wait, if विधित्वम् = "साक्षात्साधुत्व...",
then अतिदेशत्वम् = "साक्षात्साधुत्वातिरिक्तधर्मारोपग्राहकत्वं" or "साक्षात्साधुत्वेतरधर्मारोपग्राहकत्वं" or "साक्षात्साधुत्वाद्धर्मारोपग्राहकत्वं"?
Wait, look at:
सा (sa) - क्षा (ksha) - त् (t) - सा (sa) - धु (dhu) - त्वा (tva) - त् (t) / द् (d)
Wait, look at the word:
Can you see 'नि'?
No, look at:
सा - क्षा - त् - सा - धु - त्वा - द्ध - र्मा - रो - प -