वैयाकरण सिद्धान्त कौमुदी (भट्टोजि दीक्षित - बालमनोरमा व तत्त्वबोधिनी टीका सम्पूर्ण पूर्वार्ध)
Vaiyakarana Siddhanta Kaumudi of Bhattoji Dikshita with Commentary
भट्टोजि दीक्षित (टीकाकार: वासुदेव दीक्षित एवं ज्ञानेन्द्र सरस्वती) द्वारा
पृष्ठ 453, कुल 835 में से
संदर्भ में पढ़ेंप्रत्यवसानार्थशब्दकर्माकर्मकाणामणि कर्त्ता स णौ (१।४।५२) and "ह्रीक्र्योरन्यतरस्याम्" (१।४।५३).
Look at line 34: "गत्यर्थाकर्मक..."
Wait, what are the letters after 'गत्यर्थाकर्मक'?
Let's zoom in on line 34:
"अन्येषां गत्यर्थाकर्मक..."
Then: 'ह्रुकरीणां'?
Look at the characters:
ह्र (ह with ऋ = हृ)
क (क with repha and ई? or क carrying something?)
Wait, let's look at the letters:
ग, त्य, र्था, क, र्म, क, हृ, क, रो, ती, नां
Wait: 'हृ' or 'अकर्मक'?
Wait, the text has:
ग - त्य - र्था - क - र्म - क - हृ - क्रो - र्ण्ये - न्ता - नां?
Wait, look at:
ग - त्य - र्था - क - र्म - क - ह्री - क्रो - री - णां?
Let's examine:
अ - न्ये - षाम्
ग - त्य - र्था - क - र्म - क - ...
Wait! Look at line 12 of the main text:
"प्रयोज्यकर्मण्यन्येषां ण्यन्तानां लादय