वैयाकरण सिद्धान्त कौमुदी (भट्टोजि दीक्षित - बालमनोरमा व तत्त्वबोधिनी टीका सम्पूर्ण पूर्वार्ध)
Vaiyakarana Siddhanta Kaumudi of Bhattoji Dikshita with Commentary
भट्टोजि दीक्षित (टीकाकार: वासुदेव दीक्षित एवं ज्ञानेन्द्र सरस्वती) द्वारा
पृष्ठ 415, कुल 835 में से
संदर्भ में पढ़ें" no: "ह्वः संप्रसारणम्" ६।१।३२: "ह्वः सम्प्रसारणम् । अभ्यस्तस्य । णौ च संश्चङोः")
Wait, sutra 6.1.32 is: "ह्वः सम्प्रसारणम्" (6.1.32).
Wait, Panini 6.1.32 is:
"ह्वः संप्रसारणम्"
No, Panini 6.1.32 is: "ह्वः संप्रसारणम्" or what?
In 6.1:
6.1.32 is "ह्वः" (with संप्रसारणम् from 6.1.13).
Then what are the examples?
For सम्-परे: wait, no, "सम्परे" or "सनि परे"?
Ah, "सनि परे चङ्परे च णौ"!
Look at L13:
"॥ सनि परे चङ्परे च णौ ह्वः संप्रसारणं स्यात् ॥"
Wait, look at L13:
Is it "सनि परे" or "सम्परे"?
Let's look at the letters in L13:
॥
स
न्पे? or न्परे? No, look:
स, then न with a virama or न्परे? Wait, look at the first letter after ॥:
स
then न्परे?