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सर्वकोश
वैयाकरण सिद्धान्त कौमुदी (भट्टोजि दीक्षित - बालमनोरमा व तत्त्वबोधिनी टीका सम्पूर्ण पूर्वार्ध)

वैयाकरण सिद्धान्त कौमुदी (भट्टोजि दीक्षित - बालमनोरमा व तत्त्वबोधिनी टीका सम्पूर्ण पूर्वार्ध)

Vaiyakarana Siddhanta Kaumudi of Bhattoji Dikshita with Commentary

भट्टोजि दीक्षित (टीकाकार: वासुदेव दीक्षित एवं ज्ञानेन्द्र सरस्वती) द्वारा

DevanagariHindipublished835 पृष्ठ

पृष्ठ 400, कुल 835 में से

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पृष्ठ 400

खच्चाति? Or खच्ञाति?
Wait, look at line 9:
"खचाति" or "खच्चाति"? It has ख, then a conjunct: च् and something.
Wait, let's look at line 10:
"च्छ्वोः शूडनुनासिके च । ६ । ४ । १९ ॥ सनुकस्य छस्य वस्य च क्रमाच्छ"
Wait, if it is वान्ता (खव्), then:
खव् + श्ना + ति:
By "च्छ्वोः शूडनुनासिके च", वस्य ऊट्!
So ख + ऊट् + ना + ति = खू + ना + ति?
Wait, by "वृद्धिरेचि" / गुण? ख + ऊ -> वृद्धि: "खौनाति"!
"खौनाति । चखाव । खविता ।"
Wait! If it is वान्ता, it is "खौनाति"!
If it is च-कारान्त, what is it? "खचाति"? Or "खच्नाति"?
Wait, look at the print: "खचाति" - wait, is there a dot/virama? It looks like "खच्चाति" or "खचाति". It has ख, then च, then ा, then ति: "खचाति" or "खच्चाति"? Let's look closely at line 9:
"खच भूतप्रादुर्भावे । भूतप्रादुर्भावोऽतिक