वैयाकरण सिद्धान्त कौमुदी (भट्टोजि दीक्षित - बालमनोरमा व तत्त्वबोधिनी टीका सम्पूर्ण पूर्वार्ध)
Vaiyakarana Siddhanta Kaumudi of Bhattoji Dikshita with Commentary
भट्टोजि दीक्षित (टीकाकार: वासुदेव दीक्षित एवं ज्ञानेन्द्र सरस्वती) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंपरस्मैपदानांमपि प्रत्ययत्वात् तेषां
[Wait: आत्मनेपदपरस्मैपदानांमपि or आत्मनेपदपरस्मैपदानान्मपि or आत्मनेपदपरस्मैपदानाम्?
Look at: "आत्मनेपदपरस्मैपदानांमपि" or "आत्मनेपदपरस्मैपदानान्मपि"?
It says: "आत्मनेपदपरस्मैपदानान्मपि" or "आत्मनेपदपरस्मैपदानाम्"?
Wait, look at: "आत्मनेपदपरस्मैपदानान्मपि":
आ त्म ने प द प र स्मै प दा ना म पि -> look at the anusvara and 'म':
पदानांमपि or पदानामपि?
There is an anusvara: पदानांमपि!]
[L...] च “अनुदात्तङित आत्मनेपदम्” इत्यादिभिर्विधानेऽपि तृतीयाध्यायगोचरत्वाभावात् पदव्यवस्थाप्रकरणयो-
[L...] जनमत्रासङ्गतमित्यपास्तम् ॥
Wait, let's re-examine:
"श्रौत्रैार्हन्तीचगणैर्गुण्यैर्महर्षिभिरहर्दिवम् ।"
Wait! Look at the first line of the verse again!
Could it be:
श्रौत्रैरन्तेवासिगणैर्?
Let's look at the letters:
श्रौ - त्रै -
then a stroke: is it