सामग्री पर जाएँ
सर्वकोश
वैयाकरण सिद्धान्त कौमुदी (भट्टोजि दीक्षित - बालमनोरमा व तत्त्वबोधिनी टीका सम्पूर्ण पूर्वार्ध)

वैयाकरण सिद्धान्त कौमुदी (भट्टोजि दीक्षित - बालमनोरमा व तत्त्वबोधिनी टीका सम्पूर्ण पूर्वार्ध)

Vaiyakarana Siddhanta Kaumudi of Bhattoji Dikshita with Commentary

भट्टोजि दीक्षित (टीकाकार: वासुदेव दीक्षित एवं ज्ञानेन्द्र सरस्वती) द्वारा

DevanagariHindipublished835 पृष्ठ

पृष्ठ 163, कुल 835 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 163

shape, and a blob!
Wait, could it be: निर्देशात्?
Wait, if it's निर्देशात्, then what is the letter after it?
Wait, is that letter 'य'?
Yes, it's 'य'!
Wait, why "निर्देशात् य"?
Because: "भावप्रधानत्वान्निर्देशात् य ईश्वरत्वपर इति" or "भावप्रधानत्वान्निर्देशाद्य ईश्वरत्वपर इति" (sandhi: निर्देशात् + यः = निर्देशाद्यः / निर्देशाद् यः)!
Wait, or is that blob an anusvara? No, it's too big, it's a smudge.
Wait, could it be: भावप्रधानत्वान्निर्देशात् 'य' ईश्वरत्वपर इति?
Notice: 'यस्य चेश्वरवचनम्' has TWO words: 'यस्य' and 'ईश्वरवचनम्'!
Wait! "यस्य" begins with 'य'!
Could it say: भावप्रधानत्वान्निर्देशात् 'य' ईश्वरत्वपर इति?
Wait, no: 'ईश्वर' is ঈশ্বরत्वपर, not 'य'!
The text says:
'ईश्वरशब्दो भावप्रधानत्वान्निर्देश... ईश्वरत्वपर' इति 'यस्य' इति षष्ठ्या निष्ठत्वं निरूपितत्वं वाऽर्थः ।
Notice the structure:

  1. ईश्वरशब्दो ... ईश्वरत्वपर इति (Explanation of ईश्वरशब्द)
  2. `'यस्य' इति षष्ठ्या निष्ठ