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वैयाकरण सिद्धान्त कौमुदी (भट्टोजि दीक्षित - बालमनोरमा व तत्त्वबोधिनी टीका सम्पूर्ण पूर्वार्ध)

वैयाकरण सिद्धान्त कौमुदी (भट्टोजि दीक्षित - बालमनोरमा व तत्त्वबोधिनी टीका सम्पूर्ण पूर्वार्ध)

Vaiyakarana Siddhanta Kaumudi of Bhattoji Dikshita with Commentary

भट्टोजि दीक्षित (टीकाकार: वासुदेव दीक्षित एवं ज्ञानेन्द्र सरस्वती) द्वारा

DevanagariHindipublished835 पृष्ठ

पृष्ठ 142, कुल 835 में से

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पृष्ठ 142

: there is a small vertical stroke, like 'क' or 'त्'?
Wait, look at line 10:
ह, र्य, भि, न्नै, का, श्र, य, then:
There is a "क" with something on top, then "प्रीत्यनुकूल"!
Wait, why would there be a "क" before प्रीति?
In Nyaya/Vyakarana:
कर्मप्रत्यय (आत्मनेपद in सेव्यते): "हर्यभिन्नैकाश्रय-क-प्रीति..."?
Yes! "हर्यभिन्नैकाश्रयका या प्रीतिः, तदनुकूलः चैत्राभिन्नैकाश्रयको व्यापारः"!
"हर्यभिन्नैकाश्रयिका प्रीतिः" or "हर्यभिन्नैकाश्रयका प्रीतिः"!
Look at line 10:
"हर्यभिन्नैकाश्रय क प्रीत्यनुकूल..."
Wait, what is on top of that क?
It's a repha? No, it's "हर्यभिन्नैकाश्रय-" then a letter, wait, let's look very closely:
Is it "हर्यभिन्नैकाश्रयप्रीत्यनुकूल"?
Wait, count the letters:
1: ह
2: र्य
3: भि
4: न्नै
5: का
6: श्र
7: य
8: ? (looks like 'क' with a small repha or hook: 'र्क'? No, 'क' with a stroke:

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