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सर्वकोश
वैशेषिक दर्शन (प्रशस्तपाद भाष्य सहित)

वैशेषिक दर्शन (प्रशस्तपाद भाष्य सहित)

Vaisheshika Darshan with Prashastapada Bhashya

महर्षि कणाद / महर्षि प्रशस्तपाद द्वारा

स्रोत: चौखम्बा संस्कृत सीरीज · चौखम्बा संस्कृत सीरीज · 1950 (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished759 पृष्ठ

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पृष्ठ 74

प्रशस्तपादाचार्यप्रणीतं
प्रशस्तपादभाष्यम्
[ पदार्थधर्मसङ्ग्रहाख्यम् ]
श्रीधरभट्टकृत-
न्यायकन्दलीव्याख्योपेतम्
श्रीदुर्गाधरझाकृत-हिन्दीभाषानुवादसहितम्
प्रशस्तपादभाष्यम्
प्रणम्य हेतुमीश्वरं मुनिं कणादमन्वतः ।
पदार्थधर्मसङ्ग्रहः प्रवक्ष्यते महोदयः ॥
(सभी जन्यपदार्थों के) कारण ईश्वर को प्रणाम करने के पश्चात्
कणाद मुनि को प्रणाम करके 'महोदय' अर्थात् मोक्ष देनेवाले 'पदार्थ-
धर्मसङ्ग्रह' नाम के ग्रन्थ को लिख रहा हूँ।
न्यायकन्दली
अनादिनिधनं देवं जगत्कारणमीश्वरम् ।
प्रपद्ये सत्यसङ्कल्पं नित्यविज्ञानविग्रहम् ॥ १ ॥
ध्यानैकतानमनसो विगतप्रचाराः पश्यन्ति यं कमपि निर्मलमद्वितीयम् ।
ज्ञानात्मने विघटिताखिलबन्धनाय तस्मै नमो भगवते पुरुषोत्तमाय ॥ २ ॥
आदि और विनाश से रहित एवं जगत् के निमित्तकारण, तथा जिनके संकल्प
कभी विफल नहीं होते, नित्यविज्ञानस्वरूप उन परमेश्वर की शरण को मैं प्राप्त
होऊँ ॥ १ ॥
सभी दोषों से रहित एवं सांसारिक सभी वस्तुओं से सर्वथा विलक्षण जिस
वस्तु को योगिगण एकाग्र होने पर देखते हैं, सभी बन्धनों से शून्य, ज्ञान-स्वरूप
उन भगवान् पुरुषोत्तम को मैं प्रणाम करता हूँ ॥ २ ॥