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सर्वकोश
वैशेषिक दर्शन (कणाद सूत्र व हिन्दी भाष्य सहित)

वैशेषिक दर्शन (कणाद सूत्र व हिन्दी भाष्य सहित)

Vaisheshika Darshana with Hindi Bhashya

महर्षि कणाद द्वारा

स्रोत: स्वामीमेशिन यन्त्रालय · स्वामीमेशिन यन्त्रालय (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished160 पृष्ठ

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ओ३म्
व्याख्याय न्यायशास्त्रं तदनु च सुधियो ! योगशास्त्रं क्रमेण
तत्पश्चात् सांख्यशास्त्रं कपिलमुनिकृतं व्याकृतं व्याख्यया तत् ।
काणादे सूत्रजाते तदनु च वितनोम्य़ार्य्यभाषानुवादं
यं दृष्ट्वा भद्रसामाजिकजनहृदये ज्ञानसूर्योदयःस्यात् ॥ १ ॥
अथ वैशेषिकदर्शन-भाषानुवादः
तत्र
प्रथमोऽध्यायः
मोक्ष के असाधारण हेतुभूत तत्त्वज्ञान का उपदेश करने के लिये कणाद
मुनि तत्त्वज्ञान के हेतु धर्म के व्याख्यान की प्रतिज्ञा करते हैं:—
१-अथातो धर्मं व्याख्यास्यामः ॥ १ ॥
( अथ ) अब ( अतः ) इस से आगे ( धर्मं ) धर्म को ( व्याख्यास्यामः )
हम व्याख्यात करेंगे ॥ १ ॥ आगे धर्म का लक्षण करते हैं:—
२-यतोऽभ्युदयनिःश्रेयससिद्धिः स धर्मः ॥ २ ॥
( यतः ) जिस से ( अभ्युदयनिःश्रेयससिद्धिः ) भोग मोक्ष की सिद्धि हो
( सः ) वह ( धर्मः ) धर्म है ॥
उन वेदोक्त शुभकर्मानुष्ठान और तत्त्वज्ञानोपदेशक वेदादि शास्त्राभ्यास
का नाम धर्म है, जिन से सांसारिक ( ऐहिक, आमुष्मिक सब प्रकार के सुख
भोग और अन्त में धर्मानुष्ठान से अन्तःकरण शुद्ध होने पर उपजे ब्रह्मज्ञान
से निःश्रेयस=मुक्ति भी सिद्ध हो सके ॥ २ ॥
३-तद्वचनादाम्नायस्य प्रामाण्यम् ॥ ३ ॥
( तद्वचनात् ) उस धर्म का वचन होने से ( आम्नायस्य ) वेदादि शास्त्र
का ( प्रामाण्यम् ) प्रामाण्य है ॥