वैदिक शिक्षा पद्धति एवं गुरुकुल व्यवस्था (डॉ. भास्कर मिश्र - राष्ट्रीय वेद विद्या प्रतिष्ठान)
Vaidik Shiksha Paddhati and Gurukul System
डॉ. भास्कर मिश्र द्वारा
पृष्ठ 202, कुल 353 में से
संदर्भ में पढ़ें174 वैदिक वाङ्मय में राष्ट्रीय एकता एवं अखण्डता
है। अनेक मन्त्रों में राजा के चुनाव की बात कही गयी है। अथर्ववेद में कतिपयस्थलों
पर प्राप्त मन्त्रों में युद्धादि के लिए अति उपयोगी साधनों की भी चर्चा की गई है।
यथा- रथ, दुन्दुभि तथा शंखादि। वीरों को युद्धों के लिए उत्साहित करने वाले मन्त्र
कितने साहित्यिक तथा वीर रस एवं ओजगुण सम्पन्न हैं। यह कारुणिक दृश्य कितना
द्रवित करने वाला है-
दु॒न्दु॒भेर्वाचं॒ प्रय॑तां वद॑न्तीमाशृण्व॒ती न॑थि॒ता घोष॑बुद्धा।
नारी॑ पु॒त्रं धा॑वतु हस्त॒गृह्या॑मित्री भी॒ता सं॒मरे॑ वृ॒धाना॑म्॥
(अथर्व० ५/२०/५)
अर्थात् दुन्दुभि की नियमयुक्त गड़गड़ाहट को सुनती हुई, गर्जन से जाग्रत,
अधीन की हुई, वधनीय शस्त्रों के युद्ध में भयभीत शत्रु की स्त्री पुत्र को हाथ में
पकड़कर भाग जाये।
यह युद्धस्थल के मध्य फंसी हुई पुत्रवती नारी की प्रार्थना है।
अथर्ववेद में वीर रस का उद्रेक कराने वाला काव्य भी समाविष्ट है। वीर रस
की भावना कराने में अथर्ववेद पर्याप्त सामर्थ्य रखता है। इस विषय में दुन्दुभि सूक्त
उल्लेखनीय है। निम्नलिखित मन्त्र में दुन्दुभि द्वारा शत्रुओं को डराने की प्रार्थना की
गई है। यह मन्त्र मालोपमा का अति उत्कृष्ट उदाहरण कहा जा सकता है-
यथा॑ श्ये॒नात् प॑त॒त्रिणः॒ संवि॒जन्ते
अह॑र्दिवि सिं॒हस्य॑ स्त॒नथो॒र्यथा॑।
ए॒वा त्वं दु॑न्दुभे॒ऽमित्रा॑न॒भि क्र॑न्द
प्र त्रा॑स॒याथो॑ चि॒त्तानि॑ मोहय॥६॥ (अथर्व० ५/२१/६)
अर्थात् जिस प्रकार श्येन (बाज) से पक्षीगण भयभीत होकर भागते हैं तथा
जिस प्रकार सिंह के गर्जना से प्राणिवर्ग (डरता है), उसी प्रकार हे दुन्दुभि ! तू शत्रुओं
पर गरज तथा डरा दे और उनके चित्त को मोहित कर दे।
इस प्रकार अथर्ववेद के अनेक मन्त्रों में तत्कालीन राजनीतिक स्थिति का विशद्
परिचय प्राप्त होता है।
भूमि सूक्त- अथर्ववेद के काण्ड बारह का प्रथमसूक्त भूमिसूक्त के नाम से
प्रसिद्ध है जिसमें ६३ मन्त्र हैं। मातृभूमि की इतनी उत्कृष्ट प्रशंसा वैदिक साहित्य तो
क्या अन्यत्र भी दुर्लभ ही है। इस सूक्त में 'माता भूमिः पुत्रोऽहं पृथिव्याः' अर्थात्
पृथ्वी मेरी माता है तथा मैं मातृभूमि का पुत्र हूँ, इस तत्त्व का सविस्तार प्रतिपादन है।
CC-0. Gurukul Kangri Collection, Haridwar