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वैदिक शिक्षा पद्धति एवं गुरुकुल व्यवस्था (डॉ. भास्कर मिश्र - राष्ट्रीय वेद विद्या प्रतिष्ठान)

वैदिक शिक्षा पद्धति एवं गुरुकुल व्यवस्था (डॉ. भास्कर मिश्र - राष्ट्रीय वेद विद्या प्रतिष्ठान)

Vaidik Shiksha Paddhati and Gurukul System

डॉ. भास्कर मिश्र द्वारा

DevanagariHindipublished353 पृष्ठ

पृष्ठ 136, कुल 353 में से

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पृष्ठ 136

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108 वैदिक वाङ्मय में राष्ट्रीय एकता एवं अखण्डता
दशम मण्डल के कुछ सूक्तों में ऐसे मन्त्र मिलते हैं जिनमें मृत्यु के पश्चात् शव
संस्कार के क्रिया कर्म का विवेचन किया गया है। इन मन्त्रों से शव को भूमि में
गाड़ने का संकेत प्राप्त होता है। अत्यन्त मनोहर उपमा के द्वारा इस विषय का निरूपण
हुआ है-
'माता पुत्रं यथा सिचाऽभ्येनं भूमं ऊर्णुहि।'
"अर्थात् जिस प्रकार माता अपने पुत्र को वस्त्र से ढक देती है, हे भूमि! तुम भी
इस शव को उसी प्रकार स्वयं ढक लो।" इसी मण्डल में विभिन्न पितरों के अत्यन्त
मार्मिक संकेत प्राप्त होते हैं। शव से यमलोक पहुँचने पर पितरों की संगति करने को
कहा गया है। यथा-
सं ग॑च्छस्व पि॒तृभिः॒ सं य॒मेने॑ष्टापू॒र्तेन॑ प॒रमे व्यो॑मन्।
हि॒त्वायां॑व॒द्यं पुन॒रस्त॒मेहि॒ सं ग॑च्छस्व त॒न्वा॑ सु॒वर्चा॑ः॥
(ऋ० १०/१४/८)
'अर्थात् हे पुरुष एवं हे स्त्री! तू पालन करने वाले माता, पिता, गुरुजनों से
सत्संग कर। नियन्ता जन से और सर्व उत्कृष्ट आकाश तुल्य रक्षा स्थान परमात्मा के
अधीन रह कर यज्ञदानादि साधनों से सर्वदा युक्त रहे। निन्दनीय कार्य को त्याग कर
बार-बार गृह को प्राप्त हो और तेजस्वी बनकर सन्तान उत्पन्न करने वाली स्त्री तथा
कुलवर्धक पुत्रादि से संगति का लाभ प्राप्त कर।'
इस प्रकार उपर्युक्त विभिन्न दृष्टिकोणों से मनन किए जाने पर यह सिद्ध होता है
कि दशममण्डल वंशमण्डल की अपेक्षा अर्वाचीन है।
दशम मण्डल की अर्वाचीनता के समर्थन में अन्य विद्वानों के मत-
अनेक पाश्चात्य तथा पौरस्त्य वेदज्ञों ने दशम मण्डल को अर्वाचीन माना है।
उनके अनुसार सम्पूर्ण ऋग्वेद एक ही काल में नहीं लिखा गया। कुछ प्रमुख विद्वानों
की इस सम्बन्ध में उक्तियाँ निम्नलिखित हैं-
(अ) गॆटे का मत-
गॆटे ने अपनी पुस्तक 'Lectures on Ṛgveda' में द्वितीय से सप्तम मण्डल
पर्यन्त तक मन्त्रों को वंश-मण्डल कहा है। प्रत्येक मण्डल के मन्त्रद्रष्टा एक ही ऋषि
अथवा उसके वंशज हैं। उनके अनुसार- 'They are homogeneous in
character and arrangement.'
CC-0. Gurukul Kangri Collection, Haridwar