उत्तर गीता (आदि गौड़पादाचार्य दीपिका एवं सान्वय हिन्दी टीका)
Uttara Gita with Gaudapadacharya Dipika and Hindi Commentary
आदि गौड़पादाचार्य / महर्षि वेदव्यास द्वारा
७६ उत्तरगीतायां
हिरण्यं सुवर्णं च शाकं बाल्योद्भूतं च हेयोपादेयवैषम्यरा-
हित्येन चिन्तयेदित्यर्थः ॥
किं च—
भूतवस्तुन्यशोचित्वे ...
पुनर्जन्म न विद्यते ॥ १६ ॥
भूतवस्तुनि गतवस्तुनि अशोचित्वे गतमिति दुःखराहि-
त्ये सिद्धे, उपलक्षणमेतत्, आगामिवस्तुमिरपेक्षत्वे सिद्धे,
वर्तमानवस्तुनि लब्धे हर्षराहित्ये सिद्धे च पुनर्जन्म न
विद्यते ॥
आत्मयोगमवोचद्यो ब्रह्मयोगशिरोमणिम् ।
तं वन्दे परमानन्दं कमलगर्भमीश्वरम् ॥
इति श्रीगौडपादाचार्यविरचितायाम्
उत्तरगीताव्याख्यायाम्
तृतीयोऽध्यायः ॥
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