उत्तर गीता (आदि गौड़पादाचार्य दीपिका एवं सान्वय हिन्दी टीका)

उत्तर गीता (आदि गौड़पादाचार्य दीपिका एवं सान्वय हिन्दी टीका)
Uttara Gita with Gaudapadacharya Dipika and Hindi Commentary
आदि गौड़पादाचार्य / महर्षि वेदव्यास द्वारा
DevanagariSanskritpublished86 पृष्ठ
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॥ उत्तरगीता ॥
श्रीगौडपादाचार्यविरचितया
व्याख्यया समेता।
अखण्डं सच्चिदानन्दमवाङ्मानसगोचरम् ।
आत्मानमखिलाधारमाश्रयेऽभीष्टसिद्धये ॥
इह खलु भगवानर्जुनः धर्मक्षेत्रे कुरुक्षेत्रे भगवदुपदिष्ट-
मात्मतत्त्वोपदेशं विषयभोगप्रावण्येन विस्मृत्य पुनस्तदेवात्म-
तत्त्वं ज्ञातुं भगवन्तं पृच्छति—
अर्जुन उवाच—
यदेकं निष्कलं ब्रह्म व्योमातीतं निरञ्जनम् ।
अप्रतर्क्यमविज्ञेयं विनाशोत्पत्तिवर्जितम् ॥१॥
कारणं योगनिर्मुक्तं हेतुसाधनवर्जितम् ।
हृदयाम्बुजमध्यस्थं ज्ञानज्ञेयस्वरूपकम् ॥ २ ॥