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सर्वकोश
त्रिशतिका: पाटीगणितसार (श्रीधराचार्य - पं. सुद्युम्नाचार्य सविस्तार हिन्दी व्याख्या)

त्रिशतिका: पाटीगणितसार (श्रीधराचार्य - पं. सुद्युम्नाचार्य सविस्तार हिन्दी व्याख्या)

Trishatika / Patiganitasara of Sridharacharya with Hindi Commentary

श्रीधराचार्य (टीकाकार: पं. सुद्युम्नाचार्य) द्वारा

DevanagariHindipublished208 पृष्ठ

पृष्ठ 35, कुल 208 में से

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पृष्ठ 35

त्रिशतिका 7
प्रथम पक्ष पूर्ण वर्ग होने से द्वितीय पक्ष भी अवश्य पूर्ण वर्ग है। अतः
n = √(2S-n)
अथवा 2s = n²+n n = 2S-n²
इस प्रकार श्लोक में उल्लिखित दोनों तथ्य सर्वथा सही सिद्ध होते हैं।
पदयुतपदवर्गदलं संकलितं वा, तदष्टसंगुणितम्।
रूपयुतं तन्मूलं निरेकमर्धीकृतं गच्छः¹।।२।।
सुक्षेमा अनुवाद-अथवा पदों की संख्या से युक्त पदों के वर्ग का आधा
उन पदों का संकलित होता है। साथ ही 8 से गुणित संकलित (S) के रूप या
1 से युक्त होने पर प्राप्त संख्या का वर्गमूल तथा उसमें से 1 कम करने तथा 2
से भाग देने पर गच्छ या पद (n) की प्राप्ति होती है।
अनुशीलन-प्रथम उपबन्ध के अनुसार s = (n+n²)/2 है, जो कि पूर्वोक्त
उपपत्ति से सर्वथा स्पष्ट है। दूसरे उपबन्ध में संकलित से पद (n) प्राप्त करने का
सूत्र बताया है, जो इस प्रकार होगा-
1+2+3 के संकलित के पद (n) = (√(8S+1) - 1) / 2
इसकी उपपत्ति इस प्रकार है-
पूर्वोक्तानुसार 2S = n²+n
द्विघात समीकरण का रूप देने हेतु दोनों पक्षों को 4a से गुणा तथा 1 जोड़ने
पर-
⇒ 4n²+4n+1 = 8S+1
⇒ (2n)² + 2×2n×1+1² = 8S+1
⇒ (2n+1)² = 8S+1
⇒ 2n+1 = √(8S+1) ⇒ 2n = √(8S+1) - 1 = n = (√(8S+1) - 1) / 2
इस प्रकार हमने द्विघात समीकरण के सामान्य नियम से श्लोक में प्रोक्त
ठीक वही सूत्र प्राप्त कर लिया है। यह त्रिशतिका सूत्र 41 पृ. 80 में 'गच्छ' के
अन्तर्गत द्विघात समीकरण के विस्तृत सूत्र के सर्वथा समतुल्य है।
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१. तुल. पाटी-गणित सू. 15,