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सर्वकोश
त्रिशतिका: पाटीगणितसार (श्रीधराचार्य - पं. सुद्युम्नाचार्य सविस्तार हिन्दी व्याख्या)

त्रिशतिका: पाटीगणितसार (श्रीधराचार्य - पं. सुद्युम्नाचार्य सविस्तार हिन्दी व्याख्या)

Trishatika / Patiganitasara of Sridharacharya with Hindi Commentary

श्रीधराचार्य (टीकाकार: पं. सुद्युम्नाचार्य) द्वारा

DevanagariHindipublished208 पृष्ठ

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पृष्ठ 27

( xxvii )
46. विविध आकार के क्षेत्रों के क्षेत्रफल 44 121
47. वृत्त की परिधि तथा उसके आधार पर क्षेत्रफल 45 123
48. वृत्त का आसन्न क्षेत्रफल 46 125
49. वृत्त के कार्मुक का क्षेत्रफल 47 126
50. मुरज आदि विविध आकृतियाँ 48 129
51. समलम्ब चतुर्भुज तथा त्रिभुज 49 131
52. मध्यलम्ब या कोटि तथा अवधा 50 131
53. कोटि या लम्ब, भुज या आधार तथा कर्ण के सूत्र 51 131
54. समखात तथा विषमखात का घनफल या
घन तथा घनाभ का आयतन 52-53 137
55. कूप का फल या अपूर्ण शंकु का आयतन 54 140
56. पाषाण फल हस्त की विधि 55 144
57. गोल पाषाण का घनफल या आयतन 56 145
58. वृत्त, त्रिभुज तथा चतुर्भुज का क्षेत्रफल 57 147
59. चिति का घनफल तथा उसके ईंटों की संख्या 58 148
60. क्रकच या चीरी गई लकड़ी का अंगुल तथा
हस्त में वर्गफल 59-60 150
61. धान्य राशि का घन हस्त तथा खारी का मान 61-62 153
62. खारीधान्य घनफल 63 155
63. दीवाल के किनारे रखे धान्य का घनगणित या घन हस्त 64 155
64. काष्ठ की छाया से दिन के गत तथा शेष काल का मान 65 157
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