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सर्वकोश
त्रिपुरारहस्य (ज्ञान खण्ड - महर्षि दत्तात्रेय-परशुराम संवाद सान्वय सटीक)

त्रिपुरारहस्य (ज्ञान खण्ड - महर्षि दत्तात्रेय-परशुराम संवाद सान्वय सटीक)

Tripura Rahasya Jnana Khanda with Hindi Commentary

महर्षि दत्तात्रेय / भगवान् परशुराम द्वारा

DevanagariHindipublished404 पृष्ठ

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श्लोकानुक्रमणिका ३७७
कर्मणा ३५३ | किमत्र ३८ | को हि दुःसङ्गतः ७७
कर्म नैवा ३५८ | किमभूत् ७ | कौतुक्य १४९
कर्म शेषं १५८ | किमयं १३९ | कौमारे ७
कर्म वोपासमं २३१ | किमस्ति ३४५ | क्रमात्पूर्ण १३८
कलाविद्या २०१ | किमस्मिन् ४७ | क्रमेण ४
कश्चिद्धि ३५७ | किमहं १२१ | क्रियाभासाव २५६
कस्माद्धि ३४२ | किमहं मां ४५ | क्रियाभेदा २०३
कस्मिन्देशे १५२ | कुण्ठिता १०२ | क्रोधिनं २१४
कहोळसुत २१५ | कुतो नीचो २९ | क्रोधो लोभश्च ११३
कहोलात्मज २४२ | कुतो भोगेषु ३५ | क्वचिच्च ७६
काञ्चित ४२ | कुत्र वा ३ | क्वचिज्ज्वाला ७३
काठिन्य १५४ | कुत्र श्रद्धा ८९ | क्वचित् ९३
का देवता ३४४ | कुर्यात्ताव २७९ | क्वचित्तु १४६
कार्पशायन १३९ | कुर्वन्त्येतत् ११८ | क्वचित् २०१
कामनाया २९६ | कूपमण्डूक २५ | क्वचिदस्य ७६
कामवाण ३२ | कृत्यमारम २१० | क्वचिद्द्द्रमौ ४४
कामवेगेन ४३ | कृपया बोध १४४ | क्वोत्मील्ये १४९
कामादि ३१६ | कृपाणमाददे ४४ | क्षणिकत्वा २३७
कामादिवासित ३२१ | केचिच्छास्त्राणि २०९ | क्षणेन गत्वा २०५
कामादिवासना ३२० | केचित १०८ | क्षारं जलं १७७
काय्यकर्म २९६ | केचित् खातेषु २१ | क्षुधाभर १९
कारणं २४४ | केचित्तपः २०९ | क्षुब्धेन्द्रियो ४८
कारणत्वा ३४१ | केचिप्प्राहु १४५ | क्षौद्रमाधुर्यं ४९
कार्यं स्यादिति ९६ | केचित्समा २०८ | ख
कार्यस्या ९८ | केचिद्भूना ११८ | खण्डज्ञान २४२
कालः प्रबोधने १११ | केचिद्राज्यं २०९ | ग
कालादिभिः २६४ | केपि लोक २०९ | गगनं २३०
कालो देशश्च १५२ | केऽपि लोके २९१ | गगनं सर्वतो २३०
काष्ठलोष्ठ ११९ | केयं तवेदृशी २१२ | गणेशस्कन्द ३१२
का सा ते ११० | केवलं १६१ | गण्डशैलं १७०
किं स्वेवंविध २०८ | केवलं भावना १८७ | गतागतं २४९
किं न पश्यसि १७९ | केवलज्ञानिनो ३०१ | गत्वा तत्र ३३८
किं बहुक्तेन २५९ | केवलां चिति ५२ | गत्वा दूरं १२८
किं वक्तव्य ४८ | केवलज्ञान ३५२ | गरवेकान्ते ११६
किं स्यात् ३७ | केवलाऽपेक्षिता २३१ | गन्धमादन १०
किञ्चिदुक्त्वा ३३६ | के वा वयं ११५ | गम्भीर ३११
किञ्चिद्भावं २६० | कोऽयं बन्धः २७९ | गाढभावनया १६९
किन्तु मुख्य २३८ | को विचारो ३४३ | गिरयो १७७
किन्तूत्तर २३६ | कोऽविवेक ३४२ |