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सर्वकोश
त्रिपुरारहस्य (ज्ञान खण्ड - महर्षि दत्तात्रेय-परशुराम संवाद सान्वय सटीक)

त्रिपुरारहस्य (ज्ञान खण्ड - महर्षि दत्तात्रेय-परशुराम संवाद सान्वय सटीक)

Tripura Rahasya Jnana Khanda with Hindi Commentary

महर्षि दत्तात्रेय / भगवान् परशुराम द्वारा

DevanagariHindipublished404 पृष्ठ

पृष्ठ 177, कुल 404 में से

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पृष्ठ 177

द्वादशोऽध्यायः। १६३
अथ राजकुमारास्ते रुरुधुः सर्वतो हि तम् ।
तावत्तङ्गणपुत्रोऽपि गण्डशैलं पुरःस्थितम् ॥ १८ ॥
विवेशाश्वं समादाय पश्यत्सु राजसूनुषु ।
साश्वं शिलाविलीनं तं दृष्ट्वा राजकुमारकाः ॥ १९ ॥
विभिदुर्गण्डशैलं तं शस्त्रैरुच्चावचैः पृथक् ।
चूर्णिताद् गण्डशैलात् स महत्या सेनया वृतः ॥ २० ॥
निर्गत्य तङ्गणसुतो जिगाय युधि तान् क्षणात् ।
निहत्य सेनां सौषेणीं बध्वा राजकुमारकान् ॥ २१ ॥
प्रविवेश गण्डशैलं भूयस्तङ्गणसम्भवः ।
अथ सेनाभटाः शिष्टा गत्वा राज्ञे न्यवेदयन् ॥ २२ ॥
साश्वराजकुमाराणां हरणं गण्डशैलके ।
सुषेणो विस्मितोऽत्यन्तमुवाचाऽवरजं स्वकम् ॥ २३ ॥
वत्साऽऽशु गच्छ तं देशं यत्राऽऽस्ते तङ्गणो मुनिः ।
तपस्विनोऽचिन्त्यवीर्या अजेया देवमानुषैः ॥ २४ ॥
तब तो उन राजकुमारोंने उसे सब औरसे घेर लिया । बस,
तंगणपुत्र उस घोड़ेको ले उन राजकुमारोंके देखते-देखते उनके
सामनेवाली शिलामें घुस गया ॥ १८-१६ पू० ॥
राजकुमारोंने उसे घोड़ेके सहित शिलामें जाते देख छोटे-मोटे
हथियारोंसे उस शिलाको फोड़ डाला ॥ १६ उ०-२० पू० ॥
उस फूटी हुई शिलासे तङ्गणपुत्र बड़ी भारी सेना लेकर निकला
और क्षणभरमें ही उन्हें युद्धमें जीत लिया ॥ २० उ०-२१ पू० ॥
उसने सुषेणकी सेनाका संहार कर दिया और राजकुमारोंको
बाँधकर फिर उसी शिलामें घुस गया ॥ २१ उ०-२२ पू० ॥
तब बचे-खुचे सैनिकोंने जाकर राजाको घोड़ेके सहित राजकुमारों
के शिलामें हर ले जानेका समाचार सुनाया। इससे सुषेणको बड़ा
विस्मय हुआ और उसने अपने छोटे भाईसे कहा ॥ २२ उ०-२३ ॥
"भाई ! तुम उस देशमें जाओ जहाँ तंगण मुनि विराजमान हैं।
तपस्वियोंमें बड़ा अद्भुत सामर्थ्य होता है। वे देवता और मनुष्य
सभीके लिये अजेय होते हैं ॥ २४ ॥