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विवाह वृन्दावनम् (पं. सीताराम झा ज्योतिष टीका - विवाह संस्कार, अष्टकूट गुण-मिलान एवं मुहूर्त विज्ञान सटीक)

Vivaha Vrindavanam: Vivaha Sanskara, Ashtakuta Guna Milana evam Muhurta Vigyan

केशवार्कमहोदय (टीकाकार: पं. सीताराम झा) द्वारा

DevanagariHindipublished138 पृष्ठ

प्रकरण १७ ] वसन्तलक्ष्मीसहितम् । १२१-
इति स्मृतेयं शिशुबोधनाय श्रीकेशवार्केण विलग्नशुद्धिः ॥१७॥
सं०—मध्योदये ( सायन-सूर्य सषड्भसूर्यान्तर्वर्तिराश्युदये ) सायन-
सूर्यभोग्यं, सषड्भमुक्तं ( सायनस्य सषड्भस्य सूर्यस्य मुक्तं ) च युतं
सहितं द्युमानं दिनमानं भवति । इत्येवं श्रीकेशवार्केण शिशुबोधनाय
बालबोधाय इयं विलग्नशुद्धिः स्मृता कथिता ॥ १७ ॥
भा०—सायन सूर्य और सषड्भसायन सूर्य के मध्यवर्ती राशियों के उदययोग
में सायन सूर्य के भोग्य पल, और सषड्भसूर्य के भुक्तपल जोड़ने से दिनमान
होता है । इस प्रकार बालकों के बोध के लिये श्रीकेशवार्क दैवज्ञ ने लग्नशुद्धि
अध्याय को बनाया ॥ १७ ॥
श्रीकेशवार्केण कृते विवाह-वृन्दावने द्व्यङ्कनवेन्दु तुल्ये ।
श्रीविक्रमाब्दे लिखितात्र टीका सीतादिरामेण वसन्तलक्ष्मीः ॥
इति श्रीकेशवार्कविरचिते विवाह-वृन्दावने मिथिलादेशस्थचौगमा-
निवासि-काशीस्थसंन्यासिसंस्कृत-पाठशालाध्यापक-ज्योतिषा-
चार्य-पण्डित-श्रीसीतारामशर्मकृता वसन्तलक्ष्मीर्नाम-
संस्कृतभाषाटीका सम्पूर्णा ।
शुभम् ॥

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