तन्त्रसार (महामाहेश्वर अभिनवगुप्त - तन्त्रालोक का प्रामाणिक सार-संग्रह सटीक)

तन्त्रसार (महामाहेश्वर अभिनवगुप्त - तन्त्रालोक का प्रामाणिक सार-संग्रह सटीक)
Tantrasara of Mahamaheshvara Abhinavagupta with Commentary
महामाहेश्वर अभिनवगुप्त द्वारा
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२६ तन्त्रसार-अभिनवगुप्त [ आ. ४
इअ दढनिच्छअ णिअ लिअ हिअअह
फुरइ णाम कह जिस्स परतत्तउ ॥
परसिवतरणिकिरण-दढपातविकासिअ हिअअ कमलए ।
सरहस्स फुरिअ णिअ अइसुन्दरपरिमलबोहकरमए ॥
हतं सिवणाहु निहिल जअतत्त सुनिब्भरओत्ति विहुरी ।
फुरइ विमरिसभमरि पपलाअ णिअ लच्छि विभइरी ॥
इति श्रीमद्भिनव गुप्ताचार्य विरचिते तन्त्रसारे
शाक्तोपायप्रकाशनं नाम चतुर्थ माह्निकम् ।