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सर्वकोश
तैत्तिरीय आरण्यक (सायण भाष्य एवं भट्टभास्कर भाष्य सहित सम्पूर्ण प्रथम भाग)

तैत्तिरीय आरण्यक (सायण भाष्य एवं भट्टभास्कर भाष्य सहित सम्पूर्ण प्रथम भाग)

Taittiriya Aranyaka with Sayanacharya Commentary

कृष्ण यजुर्वेदीय महर्षि मण्डल (भाष्यकार: श्रीमत् सायणाचार्य) द्वारा

DevanagariSanskritpublished914 पृष्ठ

पृष्ठ 575, कुल 914 में से

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पृष्ठ 575

स्मिंश्चान्यो मायया संनिरुद्धः ” इति
Wait, look at line 18 after संनिरुद्धः ”:
There is a mark before or over इति:
It looks like ३ superscript followed by इति!
Wait, footnote 3 says: ३ क. ख. ङ. तदन्तं ।
"तदन्तम्" means "ending with that" (i.e., in manuscripts क, ख, ङ, the text ends at 'तस्य', and has 'तदन्तं', or the quotation ends there).

Line 19:
सृष्टिप्रयोजने मतभेदा माण्डूक्यशाखायामाम्नायन्ते—

Line 20:
“ विभूतिप्रसवं त्वन्ये मन्यन्ते सृष्टिचिन्तकाः ।

Line 21:
स्वप्नमायासरूपेति सृष्टिरन्यैर्विकल्पिता ॥

Line 22:
इच्छामात्रं प्रभोः सृष्टिरिति सृष्टिर्विनिश्चिता ।

Line 23:
कालात्प्रसूतिं भूतानां मन्यन्ते कालचिन्तकाः ॥

Line 24:
भोगार्थं सृष्टिरित्यन्ये क्रीडार्थमिति चापरे ।

Line 25:
देवस्यैष स्वभावोऽयमाप्तकामस्य का स्पृहा ” ॥ इति ।

Line 26:
यः प्रसव