सामग्री पर जाएँ
सर्वकोश
तैत्तिरीय आरण्यक (सायण भाष्य एवं भट्टभास्कर भाष्य सहित सम्पूर्ण प्रथम भाग)

तैत्तिरीय आरण्यक (सायण भाष्य एवं भट्टभास्कर भाष्य सहित सम्पूर्ण प्रथम भाग)

Taittiriya Aranyaka with Sayanacharya Commentary

कृष्ण यजुर्वेदीय महर्षि मण्डल (भाष्यकार: श्रीमत् सायणाचार्य) द्वारा

DevanagariSanskritpublished914 पृष्ठ

पृष्ठ 571, कुल 914 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 571

त्येवंविधा भावना" -> line 22 starts with "विधा भावना" so "त्येवं" was at end of 21: "...निष्पद्यतामि[त्येवं]विधा भावना"!
Line 22: "...मनोवृत्तिरूपाया भाव-" -> Line 23: "नाया अभावेऽपि" -> line 23 starts with "अभावेऽप्यचिन्त्यशक्तिरूपमायैव", so "नाया" was at end of 22: "...भाव[नाया] अभावेऽपि"!
Line 23: "...विक्रियत ई-" -> Line 24: "श्वराख्यः? इन्द्रियरहितस्यापि" -> wait, line 24 starts with "इन्द्रियरहितस्याप्यचिन्त्यशक्तिबलात्", so "ई[श्वरः ।]" was at end of 23: "विक्रियत ई[श्वरः ।]"!
Line 24: "...श्रूयते--“ अपाणिपादो ज-" -> Line 25: "वनो ग्रहीता" -> line 25 starts with "ग्रहीता", so "वनो" (from जवनो) was at end of 24: "ज[वनो]"!
Line 25: "...सर्वप्राणिक-" -> Line 26: "र्माणि पूर्वमपक्कानि" -> line 26 starts with "पूर्वमपक्कानि", so "र्माणि"