तैत्तिरीय आरण्यक (सायण भाष्य एवं भट्टभास्कर भाष्य सहित सम्पूर्ण प्रथम भाग)
Taittiriya Aranyaka with Sayanacharya Commentary
कृष्ण यजुर्वेदीय महर्षि मण्डल (भाष्यकार: श्रीमत् सायणाचार्य) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंत्येवंविधा भावना" -> line 22 starts with "विधा भावना" so "त्येवं" was at end of 21: "...निष्पद्यतामि[त्येवं]विधा भावना"!
Line 22: "...मनोवृत्तिरूपाया भाव-" -> Line 23: "नाया अभावेऽपि" -> line 23 starts with "अभावेऽप्यचिन्त्यशक्तिरूपमायैव", so "नाया" was at end of 22: "...भाव[नाया] अभावेऽपि"!
Line 23: "...विक्रियत ई-" -> Line 24: "श्वराख्यः? इन्द्रियरहितस्यापि" -> wait, line 24 starts with "इन्द्रियरहितस्याप्यचिन्त्यशक्तिबलात्", so "ई[श्वरः ।]" was at end of 23: "विक्रियत ई[श्वरः ।]"!
Line 24: "...श्रूयते--“ अपाणिपादो ज-" -> Line 25: "वनो ग्रहीता" -> line 25 starts with "ग्रहीता", so "वनो" (from जवनो) was at end of 24: "ज[वनो]"!
Line 25: "...सर्वप्राणिक-" -> Line 26: "र्माणि पूर्वमपक्कानि" -> line 26 starts with "पूर्वमपक्कानि", so "र्माणि"