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सर्वकोश
तैत्तिरीय आरण्यक (सायण भाष्य एवं भट्टभास्कर भाष्य सहित सम्पूर्ण प्रथम भाग)

तैत्तिरीय आरण्यक (सायण भाष्य एवं भट्टभास्कर भाष्य सहित सम्पूर्ण प्रथम भाग)

Taittiriya Aranyaka with Sayanacharya Commentary

कृष्ण यजुर्वेदीय महर्षि मण्डल (भाष्यकार: श्रीमत् सायणाचार्य) द्वारा

DevanagariSanskritpublished914 पृष्ठ

पृष्ठ 522, कुल 914 में से

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पृष्ठ 522

' or 'तस्यर्क्सामार्यशेष'. It is indeed 'तस्यर्क्सामार्थशेषजगदात्मकत्वमु-'.

Let's check line 1:
"ईश्वरो भवेत् । कुतः । सर्वात्मत्वश्रवणात् । “ सैवर्गृक्तसाम तदुक्थं तद्यजुस्तद्ब्रह्म ”"
Wait, in line 1:
“ सैवर्गृक्तसाम ” -> wait, is it “ सैवर्गृक्तसाम ” or “ सैवर्गृक्तत्साम ”?
Look at line 1:
“ सै व र्गृ क्त सा म
Wait, 'सैवर्गृक्तसाम' - wait, is there a 'त्'?
Look at 'क्त': क + त = क्त.
Before 'सा': is there a 'त्'?
No, it's just 'क्त'!
Wait, look at 'सैवर्गृक्त':
स + ै = सै
व + र् = र्व
गृ + क्त = गृक्त?
Wait, "सैवर्क् तत् साम"!
In the print: "सैवर्गृक्तसाम" - wait, 'सैवर्गृ'? No, 'सैवर्ग्'?
Look at the character after 'सै':
व + repha = र्व.
Then: 'क्' + 'त'?
Wait, Chandogya 1.7.5 is: "सैवर्क् तत्साम तदुक्थं तद्यजुस्तद्ब्रह्म".
In sandhi: