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सर्वकोश
तैत्तिरीय आरण्यक (सायण भाष्य एवं भट्टभास्कर भाष्य सहित सम्पूर्ण प्रथम भाग)

तैत्तिरीय आरण्यक (सायण भाष्य एवं भट्टभास्कर भाष्य सहित सम्पूर्ण प्रथम भाग)

Taittiriya Aranyaka with Sayanacharya Commentary

कृष्ण यजुर्वेदीय महर्षि मण्डल (भाष्यकार: श्रीमत् सायणाचार्य) द्वारा

DevanagariSanskritpublished914 पृष्ठ

पृष्ठ 474, कुल 914 में से

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पृष्ठ 474

दि = 8
कर्म-भ्यो नान्य-दिष्-य-ते = 8!

Line 8:
पारम्पर्येण कर्मैवं वेदनायोपयुज्यते ।
पा-रम्-पर्-ये-ण कर्-मै-वं = 8
वे-द-ना-यो-प-युज्-य-ते = 8!

Line 9:
साधनं कर्म तेनैतत्त्वाध्यं ब्रह्मात्मवेदनम् ॥
Wait, look at line 9:
"साधनं कर्म तेनैतत्त्वाध्यं ब्रह्मात्मवेदनम् ॥"
Wait! Is it "तेनैतत्त्वाध्यं" or "तेनैतत्साध्यं"?
Look at the letter: 'त्सा' vs 'त्त्वा'!
In "तेनैतत्", then 'साध्यं'?
Look at the conjunct:
त् + स + ा = त्सा!
Wait, look at 'त्त्वा': in L4 'चोच्छित्तौ', त् + त = त्त.
In L9: it is 'त्साध्यं'! तेनैतत्साध्यं = तेन + एतत् + साध्यम्!
Wait, is there a double त? "तेनैतत् साध्यं" -> "तेनैतत्साध्यं".
Let's look at the letters:
त े न ै त त ् स ा ध ् य ं
Wait, between त and सा, is there a त्?
"तेनैतत्साध्य