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सर्वकोश
तैत्तिरीय आरण्यक (सायण भाष्य एवं भट्टभास्कर भाष्य सहित सम्पूर्ण प्रथम भाग)

तैत्तिरीय आरण्यक (सायण भाष्य एवं भट्टभास्कर भाष्य सहित सम्पूर्ण प्रथम भाग)

Taittiriya Aranyaka with Sayanacharya Commentary

कृष्ण यजुर्वेदीय महर्षि मण्डल (भाष्यकार: श्रीमत् सायणाचार्य) द्वारा

DevanagariSanskritpublished914 पृष्ठ

पृष्ठ 267, कुल 914 में से

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पृष्ठ 267

स्य... विभा० १"!
Yes! The Brahmana portion is in Prapathaka 5!
So ( प्रपा० ५ । अनु० ६ । विभा० १ ) is definitely 5 (५)!

Line 21:
प्रवर्ग्यस्य यज्ञशिरोरूपत्वादुपसदां च यज्ञग्रीवारूपत्वादुभयोः सामीप्यायो-
Wait: सामीप्यायो-?
Line 22:
दनुष्ठानात्प्रागेव प्रर्वग्यकर्मानुतिष्ठेत् ।
Wait, सामीप्यायो- / दनुष्ठानात्प्रागेव?
Wait, look at line 21 end and 22 start:
सामीप्यायो-
दनुष्ठानात्प्रागेव -> Wait, सामीप्याय उपसदनुष्ठानात्!
Wait: सामीप्याय + उपसदनुष्ठानात् = सामीप्यायोपसदनुष्ठानात्!
Yes! सामीप्यायो- / पसदनुष्ठानात्!
Wait, does line 22 say पसदनुष्ठानात् or दनुष्ठानात्?
Look at line 22 start:
दनुष्ठानात्प्रागेव... wait, look at footnote 4!
Footnote 4: `४ ... ॰सदोऽ