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सर्वकोश
तैत्तिरीय आरण्यक (सायण भाष्य एवं भट्टभास्कर भाष्य सहित सम्पूर्ण प्रथम भाग)

तैत्तिरीय आरण्यक (सायण भाष्य एवं भट्टभास्कर भाष्य सहित सम्पूर्ण प्रथम भाग)

Taittiriya Aranyaka with Sayanacharya Commentary

कृष्ण यजुर्वेदीय महर्षि मण्डल (भाष्यकार: श्रीमत् सायणाचार्य) द्वारा

DevanagariSanskritpublished914 पृष्ठ

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पृष्ठ 210

ायनं मा विवधीर्विक्रमस्व ॥" is indeed TA 3.15.1!
And 3.15.2 starts with: "मा छिन्दो मृत्यो मा वधीः मा मे बलं..."!
Now, what is TA 3.14?
Mantra 14 ends with:
"...तद्वै तदानीमेव त्वं प्राणोऽभवः । प्राणयति प्रकर्षेण चेष्टयतीति व्युत्पत्त्या प्राणनामकोऽभूः । कीदृशस्त्वम्—प्रजापतेर्महान्भोगोऽत्यन्तभोगहेतुः ॥"
And the mantra words being commented on are:
"यद्यदा त्वं भुजो..."
Wait, in the mantra:
"यदा त्वं भुजो..." or "भुजो भोगान्..."
Wait, the mantra text of 3.14:
Does it contain:
"भुजो..."? "प्रजापतेर्महान् भोगः..."?
Yes, "प्रजापतेर्महान् भोगः"!
And before that:
"यदा... प्राणोऽभवः..."?
Wait, look at line 4:
"यद्यदा त्वं भुजो भोगान्कारिष्यमाणः सन्भवदेवानवच्छिद्रवर्तिनश्चक्षुरादीन्द्री-"
Wait, "सन्भवदेवानवच्छिद्रवर्तिनश्चक्षुरादीन्द्री-" - could it be:
"सन् भवदे